सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ का सेक्टर-16 सबसे पहले ज्योग्रॉफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) मैप पर आ गया है। आईटी डिपार्टमेंट के अधिकारी शुक्रवार को प्रशासन के उच्चाधिकारियों के सामने इस सेक्टर का डेमो पेश करेंगे। डेमो के बाद सेक्टर-23 और 7 में जीआईएस मैपिंग का काम शुरू हो जाएगा। इसके पूरा होने के बाद शहर के लोग घर बैठे अपने कंप्यूटर पर प्रापर्टी और दूसरी तरह की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। पूरे सेक्टर-16 में गूगल सेटेलाइट व्यू मैप के बेस पर विभिन्न तरह की लेयर डाली जा चुकी हैं। इन लेयर पर क्लिक करते ही जानकारी उभरकर सामने आ जाती है।
मैप में सभी रोड, गवर्नमेंट प्लॉट, पार्क, ग्रीन एरिया, पब्लिक बिल्डिंग और सीवर लाइन की लेयर डाली जा चुकी है। ट्रांसपोर्ट लाइन डालने का काम चल रहा है। आईटी डिपार्टमेंट जीआईएस मैपिंग के काम में दिन रात जुटा है। गैस पाइप लाइन, केबल लाइन, एससीओ और एससीएफ जैसी सभी जानकारियों की लेयर डालने का काम लगभग पूरा होने वाला है। अगले दो दिनों यह काम भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद सेक्टर-16 के जीआईएस मैप को पब्लिक डोमेन में लाया जाएगा। किसी की अपनी प्रापर्टी संबंधी कोई दिक्कत तो नहीं है, यह जानने के बाद मैप फाइनल हो जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए प्रशासन को 6 करोड़ रुपये का बजट सैंक्शन हुआ है।
अतिक्रमण पर लगेगी रोक
जीआईएस मैपिंग में जूम कर प्लॉट की पूरी जानकारी देखी जा सकती है। प्लॉट की लंबाई और चौड़ाई भी नजर आती है। बाद में यदि इसकी लंबाई चौड़ाई में कोई फर्क मिलता है तो एस्टेट ऑफिस को अतिक्रमण हटवाने के लिए किसी शिकायत का इंतजार नहीं करना होगा।
यह है जीआईएस मैपिंग
जीआईएस एक कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम है जो धरती की सतह पर विभिन्न तरह केडाटा को कैप्चरिंग, स्टोरिंग, चेकिंग करने केबाद डिस्प्ले करता है। जीआईएस एक ही मैप में विभिन्न तरह का डाटा दिखाता है। यह मैप चीजों को देखने, समझने और विश्लेषण करने में सक्षम बनाता है। जिससे ग्राउंड लेवल चीजों को देखने जैसा अनुभव मिलता है। मैप डाटा लेयर में होता है। जिस लेयर पर क्लिक करेंगे उसको हाइलाइट करके दिखाएगा।
यह डाटा किया जा सकता है शामिल
इसमें जनसंख्या, इन्कम और एजुकेशन लेवल को शामिल किया जा सकता है। लैंड संबंधी डाटा में नदियों, विभिन्न तरह के पेड़-पौधों, पार्क, पार्किंग, बिल्डिंग्स और मिट्टी की जानकारी डाली जा सकती है। इसकेअलावा फैक्टरियों, खेतों, स्कूलों, ड्रेन, रोड और इलेक्ट्रिक पॉवर लाइनों की जानकारी भी इसी मैप से मिल सकती है। विभिन्न मेथड से गणना भी की जा सकती है।
वॉटर सप्लाई और सीवर लाइन की समस्या होगी खत्म
जीआईएस मैपिंग का फायदा यह होगा कि वाटर सप्लाई लाइन और सीवर लाइन की लाइन में अगर कहीं फॉल्ट आ जाता है तो उस जगह के बारे में तुरंत इस सिस्टम से पता चल जाएगा। इसको ठीक करना मुश्किल नहीं होगा।
परमिशन मिलेगी जल्द
विभिन्न प्रोजेक्ट्स अलग-अलग तरह की परमिशन नहीं मिलने के कारण ही अटके रहते हैं। कहीं पर खुदाई करने और केबल आदि की जानकारी में ही काफी समय लग जाता है। इस सिस्टम से सभी तरह की जानकारी मैप पर क्लिक करते ही उभरकर सामने आ जाएगी। जिससे परमिशन लेने में आसानी होगी।
बैरमाजरा पहला जीआईएस मैपिंग वाला गांव
सिटी के साथ प्रशासन गांवों में भी जीआईएस मैपिंग का काम शुरू कर चुका है। बैरमाजरा पहला जीआईएस मैंपिंग वाला गांव होगा। इसका बेस मैप भी तैयार हो चुका है। प्रापर्टी संबंधी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।