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चेयरमैन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची छात्रा, याचिका में लगाए गंभीर आरोप

Sat, 24 Dec 2016 10:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीड़ित लड़की
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अंतरराष्ट्रीय पशु चिकित्सा शिक्षा संस्थान और अनुसंधान केंद्र के चेयरमैन के खिलाफ छात्रा हाईकोर्ट पहुंची है। गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रा ने याचिका दायर करके संस्थान की मान्यता रद्द करने की अपील की है।
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छात्रा ने रोहतक के अंतरराष्ट्रीय पशु चिकित्सा शिक्षा संस्थान और अनुसंधान केंद्र को संचालित करने वाले ट्रस्ट के चेयरमैन व उनके परिवार के गर्ल्स हॉस्टल में रहने तथा उनकी ओर से हॉस्टल का बाथरूम इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है।

यह आरोप एक छात्रा ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में लगाया है। दिल्ली निवासी बीवीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा ने मामले में संस्थान को बंद कर इसकी मान्यता रद करने की मांग की है। साथ ही उसने मामले की विजिलेंस से जांच करवाने की भी अपील की है।
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याचिका पर हाईकोर्ट ने लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विश्वविद्यालय हिसार के रजिस्ट्रार, हरियाणा के पशु पालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, भारत सरकार, पशु चिकित्सा काउंसिल ऑफ इंडिया, जन शक्ति चैरिटेबल ट्रस्ट रोहतक के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक, अंतरराष्ट्रीय पशु चिकित्सा शिक्षा संस्थान और अनुसंधान केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं।
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शिकायत करने पर उपस्थिति कम दिखाने की धमकी देते हैं

पीड़ित लड़की
याचिकाकर्ता के वकील सरदाविंदर गोयल ने हाईकोर्ट में बताया कि याची छात्रा ने ऑल इंडिया वेटरनिटी टेस्ट 2016 में भाग लिया था। रैंक के आधार पर उसे अंतरराष्ट्रीय पशु चिकित्सा शिक्षा संस्थान और अनुसंधान केंद्र बहू अकबरपुर, रोहतक में प्रवेश मिला।

याची ने कहा कि संस्थान में जहां पर लड़कियों का हास्टल है, उसी फ्लोर पर गर्ल्स हॉस्टल में संस्थान को चलाने वाले ट्रस्ट का चेयरमैन भूपेंद्र मलिक अपने परिवार के साथ रहता है। चेयरमैन का परिवार बाथरूम की गर्ल्स हॉस्टल का इस्तेमाल करता है।

याची ने कहा कि इन परिस्थितियों में लड़कियों को बाथरूम का इस्तेमाल भी डर के साए में करना पड़ता है। कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। जब इस बाबत कोई शिकायत करना चाहता है तो उसे उपस्थिति कम दिखाने का डर दिखाया जाता हैं।

एक अनुपस्थिति पर 1000 रुपये वसूल किए जाते हैं। सभी तरह की फीस भी दोगुना कर दी गई है। हास्टल फीस जो एक लाख रुपये सालाना थी, उसे दो लाख रुपये कर दिया गया है। इतना ही नही कालेज का स्टाफ भी अयोग्य है।
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