1984 के दंगों के 39 साल पूरे होने पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा है कि यह नरसंहार दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के लिए बड़ा कलंक है। सरकार ने इसे धोने के लिए कुछ नहीं किया। सिख समुदाय इसे कभी नहीं भूल सकता। 1984 के सिख नरसंहार की परिस्थितियां और घटनाएं संयुक्त राष्ट्र की नरसंहार के लिए निर्धारित परिभाषा पर सटीक बैठती है, जिसके अनुसार किसी भी समुदाय, धर्म और रंग के लोगों को मार दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि 1984 में सामूहिक हत्याओं के लिए सिखों के घरों को चिह्नित करने में मतदाता सूचियों का उपयोग और सिखों के खिलाफ हिंसा के दौरान पुलिस की चुप्पी सिख नरसंहार के स्पष्ट प्रमाण हैं। ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सिखों के हत्यारे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित न्याय के लिए अदालतों में धक्के खाते-खाते इस दुनिया से जा रहे हैं। उन्होंने स्कॉटलैंड की संसद में नवंबर 1984 के सिख नरसंहार को सिख विरोधी हिंसा के रूप में मान्यता देने के लिए वहां की सरकार को धन्यवाद दिया और यह भी कहा कि अन्य देशों को भी इसे सिख नरसंहार के रूप में मान्यता देनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को सिखों के हत्यारों को फांसी देनी चाहिए थी। वहीं, सिख नरसंहार का प्रस्ताव संसद में लाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि अन्य देश सिख विरोधी नरसंहार की निंदा करते हुए प्रस्ताव ला रहे हैं लेकिन भारत में सिख नरसंहार के मुख्य दोषियों और साजिशकर्ताओं को 39 साल बाद भी सजा नहीं मिली है।