राम मंदिर भूमि पूजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए संबोधन में श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित ‘गोबिंद रामायण’ के जिक्र से नया विवाद खड़ा हो गया है। तरनतारन के कस्बा चब्बा में 2015 में सिख संगठनों द्वारा गठित ‘सरबत खालसा’ की ओर से मनोनीत श्री अकाल तख्त साहिब के समांतर जत्थेदार ज्ञानी ध्यान सिंह मंड ने प्रधानमंत्री से 15 दिन के भीतर अपना बयान वापस लेने और सिख कौम से माफी मांगने को कहा है।
उन्होंने कहा कि अगर पीएम मोदी ने अपना बयान वापस नहीं लिया और सिख कौम से माफी नहीं मांगी तो एक नया गुरमत्ता (धार्मिक प्रस्ताव) पारित करके सिख कौम को उनके विरुद्ध धारा 295 (ए) के तहत मामला दर्ज करवाने के आदेश जारी किए जाएंगे। समांतर जत्थेदार भाई ध्यान सिंह मंड ने अपने साथियों के साथ इस मुद्दे पर विचार विमर्श के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय के बाहर बैठक का आयोजन किया।
इस बैठक में एक गुरमत्ता (धार्मिक प्रस्ताव) पारित किया गया। इस गुरमत्ता को जारी भी कर दिया गया। इस गुरमत्ता में तख्त श्री पटना साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह को भी स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए है। उन्होंने सिखों को लव-कुश के वंशज बताकर विवादित बयान दिया था।