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Chandigarh News: सीबीआई की एफआईआर और घर पर तलाशी के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे घुमन

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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व स्वीकृति नहीं लेने की दलील
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सरकारी फैसलों से जुड़े मामले में जांच और तलाशी को बताया गैरकानूनी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी अधिकारी के पद पर तैनात राजबीर सिंह घुमन ने अपने खिलाफ सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर और इसके बाद उनके पैतृक घर पर की गई तलाशी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में घुम्मन ने दावा किया है कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पंजाब सरकार से अनिवार्य पूर्व स्वीकृति नहीं ली गई। उनका कहना है कि मामला उनके सरकारी दायित्वों के निर्वहन और अधिकारियों की नियुक्ति व तबादले से जुड़े कथित फैसलों से संबंधित है। ऐसे मामलों में कानून के तहत जांच शुरू करने से पहले सक्षम सरकार की अनुमति जरूरी है।
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घुम्मन ने याचिका में सीबीआई की एफआईआर रद्द करने, तलाशी वारंट और उसके आधार पर की गई तलाशी कार्रवाई को अवैध घोषित करने तथा मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका के अनुसार घुम्मन को पंजाब सरकार ने 31 मार्च 2022 के आदेश के तहत मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष ड्यूटी अधिकारी नियुक्त किया था। उनके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला 31 अक्तूबर 2025 को शुरू हुआ, जब पंजाब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के निदेशक को शिकायत दी गई थी। पांच अक्तूबर 2026 को हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने अलग याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। इसी दिन सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा-द्वितीय, नई दिल्ली ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अलावा भारतीय न्याय संहिता की धाराएं भी लगाई गई हैं। याचिका में कहा गया है कि एफआईआर दर्ज होने के अगले ही दिन छह अक्तूबर को सीबीआई के सहायक पुलिस अधीक्षक ने चंडीगढ़ स्थित विशेष अदालत से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 96 के तहत तलाशी वारंट हासिल किया। इसके बाद सीबीआई की टीम ने पंजाब के संगरूर जिले में स्थित घुम्मन के पैतृक गांव घराचों के आवास पर तलाशी ली। किसी सरकारी अधिकारी के आधिकारिक फैसले या सिफारिश से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत सक्षम सरकार की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य है। लेकिन उनके मामले में ऐसी कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई। घर पर तलाशी के दौरान परिवार के सदस्यों की अनुपस्थिति में देर रात तक कार्रवाई चली। याचिका में तलाशी कार्रवाई को उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए एफआईआर, तलाशी वारंट और उसके आधार पर की गई कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई है।
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