विशेषज्ञों की मानें तो ब्रांडेड दवाइयां निजी दवा कंपनियों द्वारा बनाई गई दवाइयां होती हैं। इसका एक विशेष नाम तय कर उसका शुल्क निर्धारित किया जाता है जबकि जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है। जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती। हालांकि दोनों दवाइयों में रासायनिकगुण एक जैसे ही होते हैं। जेनेरिक दवाएं उसी नाम से जानी जाती हैं, जिस सॉल्ट से बनाई जाती है, जबकि ब्रांडेड दवाएं कंपनी द्वारा तय किए गए ब्रांड नाम से।
जेनेरिक दवाएं उच्च गुणवत्तायुक्त
जन औषधि केंद्र पर बिकने वाली जेनेरिक दवाएं उच्च गुणवत्तायुक्त होती हैं। पीजीआई में संचालित हो रहे जन औषधि केंद्र से पीजीआई भर्ती मरीजों के लिए भी दवाइयां लेता है। इससे ही इसकी गुणवत्ता का अनुमान लगाया जा सकता है। जेनेरिक दवाओं की कीमत से उसकी गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता। इसकी कीमत सरकार जनता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय करती है। इसलिए वह सस्ती दर पर हमें उपलब्ध हो जाती है। -प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई
मरीजों को सस्ते दर पर दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही जन औषधि केंद्र की स्थापना की गई है। कोरोना के मरीजों को अगर जेनेरिक दवाएं दी जा रही है तो वे कतई यह न सोचें कि इन सस्ती दवाओं से स्वास्थ्य लाभ नहीं होगा। जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति सरकार की तरफ से होने के कारण इस पर ब्रांड और उसकी बिक्री पर आने वाले खर्च को शामिल नहीं किया जाता। इस कारण यह सस्ते दर पर लोगों को उपलब्ध हो जाती है। यह बेहद कारगर हैं।
-डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य
ब्रांडेड से कमतर नहीं जेनेरिक दवाएं
जेनेरिक दवाएं किसी भी मायने में ब्रांडेड दवाओं से कमतर नहीं होती। गुणवत्ता के मामले में भी ब्रांडेड दवाओं की ही तरह कारगर होती हैं। सिर्फ उन पर ब्रांड का नाम नहीं लगा होता। ऐसे में केवल ब्रांड के चक्कर में जाकर जेनेरिक दवाओं का सेवन न करने की भूल न करें। ब्रांडेड दवाइयों की तरह जेनेरिक दवाएं भी फायदा पहुंचाती हैं। -डॉ. आरएस बेदी, सलाहकार, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन
कोरोना के मरीजों की जरूरी दवाएं
दवा जेनेरिक में कीमत ब्रांडेड में कीमत
पैरासिटामोल 10 गोली 6 रुपये 10 रुपये
विटामिन सी 10 गोली 1 रुपये 30 से 45 रुपये
जिंक टेबलेट 18 रुपये 70 से 90 रुपये
एजिथ्रोमाइसीन 3 गोली 45 रुपये 90 से 100 रुपये
डॉक्सीसिलिन 10 गोली 16 रुपये 70 से 90 रुपये