चंडीगढ़ में गजल गायक विनोद सहगल
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आजकल बन रही फिल्मों में म्यूजिक के बढ़ते प्रयोग और गजलों की अनदेखी पर सिंगर विनोद सहगल ने खुलकर बातचीत की। उन्होंने कहा कि गजल के पीछे जाने का कारण इसके प्रचार का कम होना है और इसके लिए सबसे बड़ी दोषी आज की म्यूजिक इंडस्ट्रीज है, जो केवल वर्तमान दौर के म्यूजिक को ही महत्व देती है।
यह कहना है जाने माने गजल गायक विनोद सहगल का, जोकि टैगोर थिएटर में आयोजित तीन दिवसीय सजदा कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रस्तुति देने के लिए सिटी ब्यूटीफुल आए हुए थे। एक खास बातचीत के दौरान वीरवार को उन्होंने कुछ यादगार पलों को साझा किया। उन्होंने बताया कि 1980 में पहली बार वह जगजीत सिंह से मिले।
उनसे मेरी मुलाकात जगजीत सिंह के साथ साज बजाने वाले हरीश वानकर ने करवाई। उन्होंने(जगजीत सिंह) ही मुझे फिल्म में गाने का मौका दिया और विदेश में टूर भी उनकी बदौलत से संभव हो पाया। वह मुझे अपने छोटे भाई की तरह मानते थे और मेरे आइडल भी वही हैं।
गजल का माहौल ठंडा है
आज के गायकों द्वारा गजल की बजाए दूसरे म्यूजिक फील्ड में करियर बनाने पर उन्होंने कहा कि अगर गायकों को गजल में एक्सपोजर मिलेगा तो वो जरूर इसमें दिलचस्पी दिखाएंगे। लेकिन यह दुख की बात है वर्तमान समय में गजल का माहौल ठंडा है। इस ओर न तो कोई म्यूजिक इंडस्ट्री ध्यान दे रही है और गजल के श्रोत्रा भी कम रह गए हैं।
गजल को प्रमोट करने के लिए उठाया कदम
विनोद सहगल बताते हैं कि मैंने अपने लेवल पर गजल को प्रोमोट करने की पहल कर दी हैं। उन्होंने बताया कि अभी पिछले महीने ही मैंने दिल्ली में एक प्रोग्राम में अंबाला की सिमरन को अपने साथ परफार्म करने का मौका दिया। गुरुवार को भी वह सिमरन और सोनालिका के साथ टैगोर थिएटर में प्रस्तुति देते नजर आए।
विनोद सहगल का जन्म अंबाला कैंट में 1953 में हुआ था। गायकी उन्हें विरासत में मिली। अंबाला में ही विनोद सहगल ने गणेश प्रसाद शर्मा, आशा छावड़ा और आर एम कुलकर्णी ने क्लासिकल म्यूजिक में तालीम हासिल की।