ये रात ये चांदनी फिर कहां... तेरे इश्क की इंतेहां... जैसी प्रसिद्ध गजलें जब पंजाब कला भवन में गूंजी तो श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। यह गजलों की शाम का आयोजन किया पंजाब संगीत नाटक अकादमी ने।
इस साप्ताहिक कार्यक्रम में अपनी मधुर आवाज को बिखेरा लुधियाना के गजल गायक रंधीर कंवल ने। उन्होंने श्रोताओं की मांग पर गजलें भी सुनाई। पंजाब संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन हरजिंदर कौर और प्रसिद्ध नाटककार आत्मजीत ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
लुधियाना के रंधीर कंवल ने अपना कार्यक्रम शुरू किया मिर्जा गालिब की गजल ये ना थी हमारी किस्मत कि मिशाल-ए-यार होता से। इसके बाद उन्होंने इंकबाल की गजल तेरे इश्क की इंतेहा चाहता हूं... सुनाई। फिर शिव बाटलवी का गीत कि पुछदे हो हाल फकीरां दा सुनाया।
इसके बाद उन्होंने सुरजीत पात्र का गीत कोई लंघ्या हवा बनके सुनाया। इसके बाद मीर तकी मीर का यारो मुझे माफ करो मैं नशे में हूं गीत सुनाया। उन्होंने शाह हुसैन का सूफी कलाम नी मैं किन्नू आंख्खा दर्द विछोड़े दा हाल के बाद साहिर का प्रसिद्ध गीत ये रात ये चांदनी फिर कहां सुनाकर सबका मन मोह लिया।
अंत में उन्होंने राजेंद्रनाथ की गजल तेरी खुशबू में बसे खत मैं गंगा में बहा आऊं सुनाई। इस दौरान उनके साथ तबले पर संगत दी लुधियाना के ही परमजोत सिंह ने, की बोर्ड पर जफर मिर्जा नियाजी और दिलरुबा पर संदीप सिंह के साथ बांसुरी पर मोहित जस्सल रहे।
परमजोत ने 13 घंटे तक बजाया तबला
तबले पर संगत देने वाले लुधियाना से आए परमजोत सिंह का रिकार्ड जबरदस्त है। वह न तो तबला बजाते हुए थकते हैं न ही परेशान होते हैं। उनकी इसी खूबी ने उनको बना दिया है गिनीज वर्ल्ड बुक रिकार्ड होल्डर। उन्होंने तीन सौ तेरह घंटे तक लगातार तबला बजाकर यह रिकार्ड बनाया।