ट्राइसिटी में एलपीजी गैस की किल्लत अब अस्पतालों तक पहुंच गई है। शहर के सबसे बड़े अस्पताल पीजीआई की ओपीडी कैंटीन में वीरवार को गैस खत्म होने से करीब दो घंटे तक खाना नहीं बन पाया। तेज आंच पर बनने वाले कई व्यंजन बंद करने पड़े जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को खाने के लिए जूझना पड़ा।
जीएमसीएच-32 की कैंटीन में रोजाना करीब पांच सिलिंडर की जरूरत होती है, लेकिन वीरवार को चार सिलिंडर ही मिले और शुक्रवार को एक भी नहीं पहुंचा। ऐसे में तंदूर, लकड़ी और इंडक्शन के सहारे सीमित भोजन तैयार किया जा रहा है। हालांकि अस्पताल के मेस में भर्ती करीब 800 मरीजों के भोजन पर अभी असर नहीं पड़ा है।
जीएमएसएच-16 में भी लगभग यही स्थिति है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है ताकि मरीजों के भोजन की आपूर्ति प्रभावित न हो। गैस संकट का असर अस्पतालों के बाहर लगने वाले लंगरों पर भी पड़ा है। जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 के बाहर शुक्रवार को कोई लंगर नहीं लगा, जबकि पीजीआई में केवल लकड़ी पर बनने वाला एक लंगर ही लगाया गया। इस बीच रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ने एलपीजी एजेंसी को पत्र लिखकर अस्पताल की कैंटीनों को प्राथमिकता के आधार पर गैस उपलब्ध कराने की मांग की है।
डीसी कार्यालय और गैस एजेंसियों के अनुसार शहर में प्रतिदिन करीब 12,800 घरेलू सिलिंडर की खपत होती है लेकिन फिलहाल केवल 30 से 40 प्रतिशत ही सप्लाई मिल पा रही है। वहीं कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई लगभग ठप हो गई है।
मोहाली में गैस किल्लत के कारण कालाबाजारी बढ़ गई है। रेस्टोरेंट संचालकों के अनुसार जो सिलिंडर पहले करीब 1100 रुपये में मिलता था, वह अब 2500 रुपये तक में खरीदना पड़ रहा है। कई दुकानों ने इंडक्शन चूल्हों का सहारा लिया है। कारोबारियों का कहना है कि गैस संकट जारी रहा तो खाने-पीने की चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं।
पंचकूला में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई लगभग बंद हो गई है। कई रेस्टोरेंट और कैटरिंग संचालकों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है। बाजार में सिलिंडर 3000 से 4000 रुपये तक ब्लैक में बिकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो कई आउटलेट बंद करने की नौबत आ सकती है।