एक प्राइवेट गैस एजेंसी ने गलत जानकारी देकर एक उपभोक्ता को गैस कनेक्शन बेच दिया। बाद में पता चलने पर जब उपभोक्ता ने कनेक्शन वापस देकर अपनी रकम मांगी तो एजेंसी प्रबंधक मुकर गए।
केस की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता अदालत ने एजेंसी को उपभोक्ता की सारी रकम ब्याज समेत लौटाने और दस हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
फेज-3ए निवासी प्रेम बहादुर ने उपभोक्ता अदालत में शिकायत दी थी। शिकायत के अनुसार उसने इसी साल 28 जनवरी को मोहाली गैस एजेंसी से कनेक्शन लिया था। उस समय उसे बताया गया था कि यह सेमी गवर्नमेंट एजेंसी है। यहां गैस सिलेंडर की री-फिलिंग सरकारी रेट पर होगी।
दो महीने बाद जब वह सिलेंडर लेने गया तो एजेंसी का दफ्तर ही शिफ्ट हो गया था। किसी तरह नया पता हासिल कर वह फेज एक पहुंचा। एजेंसी प्रबंधकों ने उससे प्रति सिलेंडर सरकारी रेट 430 रुपये के बजाय 680 रुपये की मांग की।
एजेंसी ने रुपये लौटाने से कर दिया था इनकार
प्रेम बहादुर ने उन्हें कहा कि वह कनेक्शन सरेंडर करना चाहता है। उसके द्वारा जमा कराई रकम 8915 रुपये उसे वापस कर दें। एजेंसी प्रबंधकों ने इससे इंकार कर दिया। पता चला कि एजेंसी जो भारती गैस बेच रही थी, वह प्राची गैस बॉटलिंग प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई निकली।
कनेक्शन देते समय प्रेम बहादुर को सिलेंडर के रेट के संबंध में गुमराह किया गया था।
सुनवाई पर एजेंसी से नहीं आया कोई
सुनवाई के दौरान एजेंसी की तरफ से कोई भी पेश नहीं हुआ। उपभोक्ता अदालत ने एजेंसी को उपभोक्ता को गलत जानकारी देकर गुमराह करने और उसकी रकम न लौटाने का दोषी करार दिया।
अदालत ने एजेंसी प्रबंधकों को शिकायतकर्ता को जमा रकम 8,915 रुपये दिसंबर 2012 से नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। एजेंसी को उसे दस हजार रुपये मुआवजा भी देना होगा।