2003 से मिलती रहती है साल दर साल मान्यता
वर्ष 2003 से हर साल इन स्कूलों को अस्थायी मान्यता मिलती रही है लेकिन 2021 में राज्य सरकार ने नियम पूरे किए बिना अस्थायी मान्यता देने से इंकार कर दिया था। इन स्कूलों में कुल विद्यार्थियों की संख्या पांच लाख के करीब है। छह माह पहले शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की बैठक हुई थी। बैठक में नियमों में छूटकर स्थाई मान्यता के लिए पाॅलिसी बनाई गई थी और इन स्कूलों से स्थाई मान्यता के लिए पोर्टल पर आवेदन मांगे गए थे लेकिन अधिकतर स्कूलों ने इसके लिए आवेदन नहीं किया।
अस्थाई मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को स्थाई मान्यता देने के लिए सरकार की तरफ से नियम काफी कड़े हैं, इनमें राहत दी जाए। साथ ही बैंक गारंटी की शर्त को हटाया जाए। मान्यता के लिए स्कूल तैयार हैं लेकिन वित्तीय स्थिति ठीक नहीं होने के चलते वे राशि नहीं जमा करा पा रहे। स्कूल संचालक मनमर्जी नहीं कर रहे, बल्कि मजबूरी में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। 60 हजार विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षा को लेकर जल्द शिक्षा मंत्री से मुलाकात की जाएगी। -सत्यवान कुंडू, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ
पहले सरकार इन स्कूलों को मान्यता देगी, इसके बाद बाद बोर्ड संबद्धता देगा। ये ही प्रक्रिया है। सरकार की मान्यता मिलने के बाद ही विद्यार्थियों का इनरोलमेंट हो सकेगा और वे बोर्ड परीक्षाओं के लिए फार्म भर सकेंगे। -ओपी यादव, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड।