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प्रो. गुरदयाल सिंह का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार, नम आखों से दी विदाई

Thu, 18 Aug 2016 10:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जैतो (फरीदकोट)
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प्रो. गुरदयाल सिंह का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार - फोटो : Amar ujala
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ज्ञानपीठ तथा पद्मश्री जैसे अनेकों राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित पंजाबी साहित्यकार प्रोफेसर गुरदयाल सिंह (83) का वीरवार को राम बाग में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रदेश भर से पहुंचे राजनीतिक, प्रशासनिक व साहित्यक शख्सियतों ने इस महान साहित्यकार को नम आंखों से विदाई दी।
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पजाब पुलिस की एक टुकड़ी ने हथियार उलटाकर और हवाई फायर करके सलामी भी दी। प्रोफेसर गुरदयाल सिंह का मंगलवार को बीमारी से निधन हुआ था। इस मौके पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तरफ से डिप्टी कमिश्नर मालविंदर सिंह जग्गी व एसएसपी दर्शन सिंह मान ने प्रो. गुरदयाल सिंह की पर्थिक देह पर फूल मालाएं चढ़ाईं।

भाषा विभाग पंजाब की तरफ से बलतेज सिंह ने उन्हें नमन किया। इससे पहले उनके आवास से शुरू हुई अंतिम यात्रा में भारतीय किसान यूनियन और पंजाब खेत मजदूर यूनियन के सैकड़ों कार्यकर्ता भी शामिल हुए और प्रोफेसर गुरदयाल सिंह अमर रहे के नारे लगाए। 
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बीमारी की वजह से मंगलवार को हुआ था पंजाबी साहित्यकार का निधन

प्रो. गुरदयाल सिंह का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार - फोटो : Amar ujala
मुखाग्नि की रस्म उनके बेटे रविंदर सिंह राही, पौते गुरविंदर सिंह व सुखप्रीत सिंह ने निभाई। इस मौके पर उनकी धर्मपत्नी बलवंत कौर, फरीदकोट से सांसद प्रो. साधू सिंह, चेयरमैन पीआरटीसी अवतार सिंह बराड़, पीपीसीसी महासचिव पवन गोयल, विधायक जोगिंदर सिंह, पूर्व सांसद गुरचरण कौर पंजगराईं, पूर्व विधायक हरदेव अर्शी, पंजाबी साहित्य अकादमी के महासचिव डॉ. सुरजीत सिंह, केंद्रीय लेखक सभा के प्रधान लाभ सिंह खीवा, पूर्व प्रधान व साहित्यकार बलदेव सिंह सड़कनामा आदि सहित प्रदेश भर से साहित्यकार व साहित्य प्रेमी शामिल हुए। उनकी आत्मिक शांति के लिए रखे गए पाठ का भोग 21 अगस्त को स्थानीय गुरुद्वारा गंगसर साहिब में डाला जाएगा। 

गौरतलब है कि प्रो. गुरदयाल सिंह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। 16 अगस्त को बठिंडा के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। साहित्य के साथ साथ पंजाब व पंजाबियत से संबंधित मामलों पर वे अच्छी पकड़ रखते थे और उनके लेख गरीब वर्ग के किसान व मजदूरों की हालत पर केंद्रित होते थे। 
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