इधर अंकित के दादा जसवंत सिंह भादू ने बताया कि अगर जीरकपुर पुलिस चाहती तो दूसरे साथियों की भांति अंकित को भी जिंदा गिरफ्तार कर सकती थी। जसवंत सिंह ने बताया कि वे जिंदा पकड़े गए दोनों गैंगस्टरों से मिलकर सच्चाई जानना चाहते थे लेकिन पुलिस ने उन्हें मिलने नहीं दिया। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि उसे किसी न किसी पार्टी का संरक्षण जरूर था।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि कोई भी युवा अंकित भादू जैसे कार्य करने का प्रयास न करे। ताकि समाज में अमन शांति कायम रखी जा सके। ज्ञात हो कि अंकित भादू पर पंजाब और राजस्थान में करीब 15 मामले दर्ज थे। जिनमें पुलिस को इसकी तलाश थी। शुक्रवार को अंकित का शव लेने के लिए उसके चाचा पूर्व सरपंच रविंद्र भादू, गांव के मौजूदा सरपंच संदीप भादू, दादा जसवंत भादू तथा अनिल कुमार सहित थाना बहाववाला से सब इंस्पेक्टर बलजीत सिंह व दो अन्य पुलिस कर्मचारी जीरकपुर गए थे।