चंडीगढ़। एरोनॉटिकल फील्ड छोड़ने की सलाह मिलने पर भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने अपने साथियों से 15 दिन तक बात नहीं की थी। सहपाठी उन्हें मजाक में चिढ़ाते थे कि उनका कद छोटा है और पैर विमान के एक्सीलेटर तक नहीं पहुंचेंगे, लेकिन उन्होंने अपने सपने से समझौता नहीं किया। यह यादें 1981 बैच के राजीव गुप्ता, अमरदीप सोढी, राजीव चड्डा, रविरंजन और अनिल कुमार ने शनिवार को साझा कीं।
मौका था पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पिकोसा) की ओर से आयोजित ग्लोबल एलुमनाई मीट 2026 का। इसमें देश-विदेश से आए पूर्व छात्र और दिग्गज शामिल हुए। वक्ताओं ने बताया कि कल्पना चावला का आत्मविश्वास, दृढ़ता और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही उन्हें अंतरिक्ष तक ले गया और आज भी छात्रों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
एलुमनाई मीट में पूर्व स्टूडेंट्स ने बताया कि यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स से काफी ज्यादा शरारती थे। कभी नगर निगम का रोड रोलर लाकर पेक कैंपस में पार्क कर देते थे तो कभी बस स्टैंड पर चलती हुई स्क्रीन उतारकर हॉस्टल के बाहर लगा देते थे। यही नहीं, स्वादिष्ट भोजन की चाहत में जुगाड़ लगाकर सीएम हाउस में चले गए थे और बेहद आवभगत के साथ खाना खाकर इज्जत के साथ लौट आए।
एक हफ्ते तक नगर निगम ढूंढता रहा था रोड रोलर
पिकोसा के ट्रेजरर जोरावर सिंह ने बताया कि उनके पापा ने उनको एक ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर दिया था। उस समय लाइसेंस बनाना इतना कठिन नहीं होता था। ड्राइविंग लाइसेंस बना तो उसमें यह नहीं लिखा था कि यह किस टू व्हीलर के लिए है या किसी अन्य व्हीकल के लिए। ऐसे में सारे विकल्प खुद टिक किए और पेक के बाहर अजीब ढंग से खड़े एक रोड रोलर को लाकर पेक कैंपस में पार्क कर दिया। एक सप्ताह तक नगर निगम उसको ढूंढता रहा था।
जिसको रोज छेड़ते थे वहीं निकली डॉक्टर
चरणजीत लाल दोनों ही दोस्त हैं। दोनों ने बताया कि उनका एक दोस्त था जो कि रोजाना एक लड़की को छेड़ता था। एक दिन अचानक वह स्किन की समस्या से ग्रस्त हो गया तो पीजीआई पहुंचे। जैसे ही रूम में डाॅक्टर के पास पहुंचे तो पता लगा डॉक्टर वही है जिस लड़की को वह छेड़ते थे। जैसे ही उसको देखा तो वहां से बिना इलाज कराए ही लौट आए।
दो समोसे खाकर देते थे एक के पैसे
एमके गुप्ता ने बताया कि चंडीगढ़ सेक्टर-11 में एक काकू हलवाई की दुकान थी, जिसमें पेक के आधे से ज्यादा दोस्त पहुंचते थे। वहां वह सब खाते दो-दो समोसे थे पर गिनवाते एक-एक थे। एक दिन काकू हलवाई ने उनसे बोला- बेटा ये तुम लोग जो दो समोसे को एक गिनवाते हो उसकी कोई बात नहीं, पर बेटा मार्क्स दोगुने ही लेकर आना।
जुगाड़ से मंत्री की बेटी की शादी में खाया था खाना
आईटी फील्ड के नामी कंसल्टेंट संजीव भिवनानी ने बताया कि किसी की शादी थी। हमारे सभी दोस्त ऐसे जुगाड़ तलाशते कि खाने-पीने का जुगाड़ बढ़िया हो। ऐसे में किसी जगह शादी होती दिखी। वहां बाहर एक व्यक्ति बड़े से थाल में पान लेकर खड़ा था। एक कानपुर का दोस्त बोलने लगा कि पान खाना है तो हमने पहले पान खाया उसके बाद मंत्री के बेटे का दोस्त बताकर पांडाल में पहुंच गए। वहां बाकायदा खाना खाया और इज्जत के साथ वापस लौट आए।