सांसद भी समर्थन में
पूर्व मेयर कुलदीप कुमार के कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2024 में नगर निगम हाउस में प्रस्ताव पारित हुआ। सांसद मनीष तिवारी ने भी साथ दिया। कुलदीप कुमार ने तो जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सीक्रेट बैलेट हटाने की मांग की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह फैसला प्रशासन को लेना होगा। इसके बाद प्रशासन ने विचार शुरू किया था। प्रशासन की सहमति के बाद डिप्टी कमिश्नर कार्यालय ने इसका प्रस्ताव तैयार किया है। डीसी निशांत कुमार यादव ने बताया कि प्रस्ताव तैयार है। इसे जल्द ही प्रशासक को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
क्रॉस-वोटिंग होगी बंद, सामने आ जाएंगे पार्टी के खिलाफ जाने वाले पार्षद
हाथ खड़े करके वोट कराने पर सबसे ज्यादा फायदा उस पार्टी को मिलेगा जिसके पास अधिक पार्षद हैं, क्योंकि कोई भी पार्षद यदि क्रॉस-वोटिंग करता है तो वह सार्वजनिक रूप से सामने आ जाएगा। इससे पार्टी के खिलाफ मतदान करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना आसान हो जाएगा। पिछले चुनाव में भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के कई पार्षदों ने भाजपा को वोट दिया लेकिन गुप्त मतदान होने की वजह से आजतक किसी पार्षद पर कार्रवाई नहीं हो पाई है। नए नियमों के लागू होने के बाद जैसे नगर निगम हाउस की बैठकों में विकास योजनाओं पर पार्षद हाथ उठाकर वोट करते हैं, वैसे ही मेयर का भी चुनाव होगा।
29 साल बाद ऐतिहासिक बदलाव
नगर निगम की स्थापना 1996 में होने के बाद से अब तक मेयर का चुनाव हमेशा गुप्त मतदान के जरिए होता रहा है लेकिन अब 2026 से इसे बदलकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हाथ उठाकर मतदान प्रणाली लागू की जा सकती है। डिप्टी कमिश्नर कार्यालय द्वारा प्रशासक के निर्देश पर यह संशोधन तैयार किया गया है, जिसे जल्द पंजाब नगर निगम अधिनियम में शामिल किया जाएगा। प्रशासक गुलाबचंद कटारिया की मंजूरी के बाद जनता से सुझाव मांगे जाएंगे और फिर अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
अनिल मसीह कांड के बाद उठी आवाज
2024 के मेयर चुनावों में तत्कालीन प्रीसाइडिंग ऑफिसर और मनोनीत पार्षद अनिल मसीह पर गुप्त रूप से आम आदमी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप कुमार के पक्ष में डाले गए आठ वोटों को जानबूझकर रद्द करने का आरोप लगा था। यह पूरा मामला कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस वोट टेम्परिंग को 'जानबूझकर की गई धांधली' करार देते हुए कुलदीप कुमार को विजेता घोषित कर दिया था। इसके बाद पूरे देश में भाजपा की आलोचना हुई और पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।