चंडीगढ़। ऐसा इंसान आपका कभी भी शत्रु नहीं हो सकता, जो आपके बहकते कदम को रोके , आपको बताए कि क्या सही है और क्या गलत है। बल्कि शत्रु तो वह इंसान होता है, जो आपके बहकते कदम को देखकर मुस्कुराता रहे और आपको रोकने का प्रयास तक न करे। उन्होंने कहा कि मित्र वही है, जो हमारी मति को सुधार दे और जीवन को गति प्रदान करे।
यह बात स्वामी रसिक महाराज ने शुक्रवार को ऑनलाइन जुड़े राष्ट्रीय ज्योतिष शिक्षण संस्थान के छात्रों से कही। उन्होंने कहा कि आज अपने और पराए की परिभाषा थोड़ी बदल सी गई है। लोग सोचते हैं कि प्रियजन वही है, जो हर स्थिति में हमारा साथ दे। हालांकि, सच्चे प्रियजन वहीं होते हैं, जो बुरे कर्म करने से हमें बचा लें।