देश की आजादी के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने वाले पंचकूला के स्वतंत्रता सेनानी 83 वर्षीय देसराज परदेसी को नौ अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एट होम में आमंत्रित किया गया है।
विदेशी ताकतों को देश से बाहर का रास्ता दिखाने में संघर्षरत रहते हुए 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी गिरफ्तारी देने पहुंचे, लेकिन कम उम्र को देखते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया।
इसके बाद भी उन्होंने संघर्ष करते हुए देश के कई बड़े नेताओं के साथ रहते हुए 10 फरवरी 1946 में गिरफ्तारी दी और फरीदकोट जेल में करीब तीन महीने तक बंद रहे। इस संग्राम का नेतृत्व देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने किया था, जो उस वक्त फरीदकोट प्रजामंडल के प्रेसिडेंट रह चुके हैं।
देसराज परदेसी ने अमर उजाला से बातचीत में पंजाब में एक बार फिर आतंकवाद के पांव पसारने के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि ऐसी ताकतों के साथ सख्ती से पेश आना होगा। इसके लिए जरूरी है कि सभी सेनाओं को और मजबूत किया जाए, ताकि कोई भी ताकत अपने नापाक मंसूबों को अंजाम नहीं दे सके।
आजादी की लड़ाई के दौरान लगातार संघर्ष करने वाले परदेसी ने आजादी के बाद भी रुके नहीं और समाजसेवा में जुटे रहे। अपने जीवनकाल में अब तक हरिजन सेवक संघ, शिशु सेवक दल, भारत सेवक समाज सहित कई संस्थानों और संगठनों से जुड़े रहे।
देश की आजादी पर फख्र करने वाले इस स्वतंत्रता सेनानी की बस यही ख्वाहिश है कि पंचकूला को भी इस तरह विकसित किया जाए जैसे देश के अन्य बड़े शहर किए जा रहे हैं।
प्रदेश भर के अलग-अलग जिलों से आमंत्रित पांच स्वतंत्रता सेनानियों में एक परदेसी ने कहा कि उनके लिए यह गौरव की बात है कि राष्ट्रपति भवन में उन्हें आमंत्रित किया गया है।