हरियाणा सरकार ने हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए व्यापक रणनीति बनाई है। जिसके तहत अनुसूचित जाति और बीपीएल वर्ग से संबंधित हेपेटाइटिस सी के मरीजों का मुफ्त इलाज के साथ कई अन्य ठोस कदम उठाए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री राव नरेंद्र सिंह ने बताया कि पीजीआईएमएस, रोहतक के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग को हेपेटाइटिस-सी मरीजों के उपचार और प्रबंधन के लिए नोडल केंद्र बनाया गया है।
हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित मरीजों की इलाज के लिए गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा को नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग में 1.78 करोड़ रुपये की लागत से प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है।
इस प्रयोगशाला में दो मशीनें लगाई जाएंगी, जिसमें लीवर की फाइब्रोसिस की स्कैनिंग के लिए फाइब्रो मशीन तथा हेपेटाइटिस-बी मरीज में वायरल के दबाव का आंकलन करने के लिए पोलीमरज चेन रिएक्शन (पीसीआर) मशीन लगाई जाएगी। जिससे मरीजों का सही उपचार एवं प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि हरियाणा के तीन जिलों फतेहाबाद, जींद और कैथल में हेपेटाइटिस-सी के प्रभाव को देखते हुए इन जिलों में बीपीएल तथा अनुसूचित जाति से संबंधित मरीजों के निशुल्क उपचार के लिए 4.64 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।
निशुल्क उपचार की सुविधा हरियाणा अधिवासी मरीजों को ही दी जाएगी। इसके साथ-साथ बीपीएल तथा अनुसूचित जाति वर्ग के मरीजों के शीघ्र प्रबंधन के लिए दो करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवा दी गई है। इस समय पीजीआईएमएस, रोहतक में स्थापित नोडल केंद्र में 240 मरीजों का उपचार किया जा रहा है।