कैंथ ने कहा कि गरीब लोगों को निशुल्क सामुदायिक केंद्र की सुविधा देने के लिए पार्षद की ओर से पत्र देना होता है। उसके बाद निगम जांच करता है, तब सामुदायिक केंद्र निशुल्क दिया जाता है। इस प्रक्रिया में आम आदमी को काफी पापड़ बेलने होते हैं, लेकिन भाजपा नेता के लिए सभी ने आंखें बंद करके कार्यक्रम की अनुमति दे दी। निगम के अधिकारियों ने इस पत्र की जांच करने की जहमत नहीं उठाई।
कैंथ ने कहा कि भाजपा कोरोना को अवसर बनाकर खूब फायदा उठा रही है। उन्होंने प्रशासक के सलाहकार से मांग की है कि मामले में विजिलेंस जांच की जाए। इसमें सामुदायिक केंद्र के लिए अनुशंसा करने वाले नाम की जांच होनी चाहिए, बुकिंग में क्या दस्तावेज लगे, सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग करने पर क्या जुर्माना होना चाहिए, कोरोना महामारी के नियमों को ताक पर रखने के लिए डीसी ऑफिस को भी जांच करनी चाहिए। हालांकि मामले में सीनियर डिप्टी मेयर ने कहा कि महिला मेरे क्षेत्र की निवासी हैं। सभी आरोप निराधार हैं। बता दें कि इस शादी में भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया था।
मेरी जानकारी में यह मामला नहीं है। ऐसा है तो हम जांच कराएंगे। गलत पाए जाने पर सामुदायिक केंद्र का पूर्ण भुगतान कराया जाएगा।
-रविकांत शर्मा, मेयर
मामला मेरी जानकारी में नहीं है। सामुदायिक केंद्र के लिए नियम हमने ही बनाए थे। इस प्रकार का कोई मामला है तो जांच करवा लेंगे। -अरुण सूद, भाजपा, प्रदेश अध्यक्ष
परिवार वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर है। वह मेरे वार्ड की निवासी हैं। मेरे पास मदद के लिए भाजपा नेत्री आईं थीं। हमने नियमानुसार ही सामुदायिक केंद्र निशुल्क कराया है।
-महेश इंदर सिंह, सीनियर डिप्टी मेयर व पार्षद
मेरे संज्ञान में मामला अभी आया है। ऐसा कुछ है तो हम मामले की जांच करवा लेंगे। इसके बाद ही आगे कुछ कहा जा सकेगा। -सौरभ अरोड़ा, संयुक्त आयुक्त, नगर निगम
सुनीता ने न फोन उठाया न संदेश का दिया जवाब
इस बारे में जब सुनीता भट्ट का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। न ही मोबाइल पर भेजे संदेश का जवाब दिया।