दो भाइयों ने मिलकर एक प्लॉट लिया। तय हुआ कि ग्राउंड फ्लोर पर एक भाई कंस्ट्रशन करेगा और फर्स्ट फ्लोर दूसरा।
कुछ समय बाद हालात बदले और ग्राउंड फ्लोर बनाने वाले भाई ने ही फर्स्ट फ्लोर का आधा-अधूरा काम पूरा करवाने के अलावा सेकेंड फ्लोर भी बनवा दिया।
कुछ दिनों बाद सेकेंड फ्लोर का अपने बेटों के नाम गिफ्ट डीड बना दिया। दूसरे भाई को जब इस हरकत का पता चला तो मामला पुलिस तक पहुंचा और जांच के बाद आरोपी और उसके दो बेटों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।
अमृतसर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर सेक्टर-5 थाने में सेक्टर-4 निवासी उसके भाई व उसके दो बेटों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (अमानत में खयानत), 420(धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी के लिए सजा), 467 (जाली दस्तावेज को इस्तेमाल करने की इच्छा), 468 (धोखा देने के लिए जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) व 120बी (साजिश रचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र सबरवाल और ओमप्रकाश सबरवाल भाई हैं। वीरेंद्र अपने परिवार के साथ अमृतसर में रहते हैं। वीरेंद्र ने ओमप्रकाश व उसके बेटे संदीप, संजय के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी है।
उन्होंने पुलिस को बताया कि कई साल पहले दोनों भाइयों ने सेक्टर-4 में 10 मरले का प्लॉट लिया था। उस दौरान तय हुआ था कि ग्राउंड फ्लोर पर ओमप्रकाश अपना घर बनाएगा और फर्स्ट फ्लोर पर वीरेंद्र।
ओमप्रकाश ने अपना घर बना लिया, लेकिन वीरेंद्र के घर को फाइनल टच नहीं दिया जा सका। चूंकि, वीरेंद्र परिवार के साथ अमृतसर में रहते हैं, इसलिए वह ज्यादा ध्यान नहीं दे सके। इसी बीच ओमप्रकाश ने सेकेंड फ्लोर पर काम शुरू कर दिया।
समझौते के खिलाफ उठाया कदम
कंस्ट्रक्शन शुरू होने का पता चलते ही जब वीरेंद्र ने विरोध किया तो समझौता हुआ कि इस फ्लोर पर दोनों भाइयों का आधा-आधा हिस्सा होगा।
वीरेंद्र ने विश्वास करके घर बनाने के लिए ओमप्रकाश के नाम पावर ऑफ अटार्नी दे दी। आरोप है कि इस अटार्नी का गलत इस्तेमाल हुआ।
ओमप्रकाश ने पावर ऑफ अटार्नी मिलते ही वीरेंद्र के हिस्से वाले पहले फ्लोर को फिनिशिंग टच दिलाया और उसे किराए पर दे दिया।
साथ ही दूसरी मंजिल का निर्माण कर अपने दोनों बेटों के नाम गिफ्ट डीड बना दिया। जब वीरेंद्र को इसका पता चला तो उन्होंने डीसीपी को शिकायत दी।
इस शिकायत की जांच के बाद सेक्टर-5 थाने में ओमप्रकाश, संदीप व संजय के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।