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PGI में कैंसर के मरीजों के साथ फ्रॉड, जानिए कैसे

Wed, 21 May 2014 01:49 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब के कैंसर मरीजों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। कैंसर मरीजों के इलाज के लिए पंजाब सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट से पीजीआई मार्केट रेट से दोगुने रेट पर दवा खरीदकर मरीजों को दे रहा है। कैंसर की जो दवा बाजार में 800 से हजार रुपये है, वहीं दवा पीजीआई की डिस्पेंसरी में दो हजार रुपये में मिल रही है।
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दवा के रेट दोगुने होने से वे पंजाब सरकार की ग्रांट का इलाज में कम इस्तेमाल कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने बाहर से खरीदी गई दवा के बिल की ग्रांट से अदायगी पर रोक लगा दी है।

ऐसे में यदि मरीज बाहर से कम दाम पर दवा खरीदकर लाता है, तो उस बिल के रुपये ग्रांट से नहीं मिलेंगे। इससे पंजाब के कैंसर मरीज काफी दुविधा में हैं।

पंजाब के कैंसर मरीजों को यदि पंजाब सरकार की ग्रांट से दवा खरीदनी है तो उन्हें इसकी दोगुना राशि का भुगतान करना पड़ेगा। इससे उसके इलाज में ग्रांट का रुपया कम पड़ जाता है। यदि वह किसी बाहरी केमिस्ट शॉप से दवा लेता है तो उसके बिल की अदायगी पंजाब सरकार की ग्रांट से नहीं होगी।
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कैंसर के इलाज में कारगर दवा वीनेट 400 की एक स्ट्रिप की एमआरपी 2655 रुपये है। डिस्काउंट के बाद पीजीआई की डिस्पेंसरी में दवा का रेट करीब 1900 रुपये है।

अमर उजाला ने जब इस रेट के बारे में अलग-अलग केमिस्ट शॉप में पड़ताल की तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। इस दवा को अब यदि मरीज पीजीआई से बाहर की किसी भी केमिस्ट शॉप से खरीदता है तो एक स्ट्रिप का दाम करीब 800 से 1000 रुपये पड़ता है।

आसानी से समझा जा सकता है कि पीजीआई की डिस्पेंसरी में कैंसर मरीज को दोगुने रेट पर दवा दी जा रही है। अमर उजाला के पास पीजीआई की डिस्पेंसरी और केमिस्ट शॉप के अलग-अलग बिल भी हैं। पीजीआई ने अपने बिल ने यह दावा किया है कि इससे कम रेट पर बाजार में दवा नहीं मिल सकती।

पंजाब सरकार देती है कैंसर मरीजों को ग्रांट
पंजाब निवासी कैंसर मरीज के इलाज के खर्च के लिए राज्य सरकार करीब डेढ़ लाख रुपये की ग्रांट देती है। पंजाब सरकार के पैनल में एम्स, पीजीआई के साथ करीब 16 हॉस्पिटल शामिल हैं। मरीज का इलाज शुरू होते ही पंजाब सरकार इन हॉस्पिटलों को रुपया भेज देती है। जैसे-जैसे इलाज होता है, रुपया ग्रांट से खर्च होता रहता है। पहले बाहर के बिलों की अदायगी पंजाब सरकार कर देती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह भी बंद कर दिया गया है।

क्या कहता है पीजीआई
पीजीआई का दवा कंपनियों के साथ कांट्रैक्ट होता है। कांट्रैक्ट के दौरान जिस डिस्काउंट पर बात तय होती है, उतने ही रेट पर दवा दी जाती है। कई दवाएं केमिस्ट शॉप से सस्ती भी मिलती हैं तो कुछ महंगी। जब तक कांट्रैक्ट चलता है तब तक पीजीआई इसमें कुछ नहीं कर सकता। कांट्रैक्ट खत्म होने के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकेगा।
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-मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
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