वहां उन्हें जम्मू-कश्मीर माझाकोट, रजौरी निवासी ठेकेदार मोहम्मद ताजुद्दीन मिला। उसने उन्हें सरिया काटने और स्टील फिटर के काम में लगा दिया। जिस ठेकेदार के पास वह काम करते थे कुछ समय बाद ठेकेदार ने उन्हें काम से निकाल दिया और वेतन भी नहीं दिया। वर्क वीजा भी समाप्त हो चुका है। लिहाजा 10 महीनों से कोई भी काम नहीं मिला।
माता कमलेश ने बताया कि तीन महीने पहले सांसद सनी देओल ने आश्वासन दिया था पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, सांसद सनी देओल के पीए गुरप्रीत सिंह ने बताया कि सनी इस मामले को लेकर काफी गंभीर हैं। वह रोज युवकों से फोन पर बातचीत करते हैं। भारत सरकार फर्जी डॉक्यूमेंट जारी नहीं करती, आरोप बेबुनियाद हैं। इमिग्रेशन और वतन वापसी के लिए जो जरूरी नियम बने हैं उन्हें फॉलो करना पड़ेगा।
विदेश मंत्रालय से मिला डॉक्यूमेंट फर्जी निकला
सुखविन्दर ने बताया कि सनी देओल ने उनकी वतन वापसी के लिए जो पत्र विदेश मंत्रालय को भेजा और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आश्वस्त पत्र जो उन्हें मिला। वह उसे लेकर कुवैत स्थित भारतीय दूतावास गए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तरह का कोई पत्र नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें फर्जी डॉक्यूमेंट देकर आश्वस्त किया गया था।