चंडीगढ़। यूटी प्रशासन और नगर निगम की ओर से अनधिकृत धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई जारी है। शुक्रवार को भारी पुलिस सुरक्षा में धनास स्मॉल फ्लैट्स के बीच ग्राउंड में बनाए गए चार धार्मिक स्थलों को हटा दिया गया। स्थानीय पार्षद रामचंदर यादव ने इस कार्रवाई का विरोध किया। कुछ देर हंगामा हुआ। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।शहर में 150 से ज्यादा अनधिकृत धार्मिक स्थलों को नगर निगम और प्रशासन की तरफ से नोटिस दिया गया था, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करना शुरू कर दिया है। धनास में तोड़े गए धार्मिक स्थल करीब 14 साल पुराने थे। आम आदमी पार्टी के स्थानीय पार्षद रामचंदर यादव ने बताया कि शुक्रवार सुबह 200-250 पुलिसकर्मी धनास के ग्राउंड में जमा हो गए। उन्हें पता चला कि टीम धार्मिक स्थलों को हटाने के लिए आई है तो उन्होंने जेसीबी के सामने खड़े होकर विरोध जताया। कार्रवाई को रोकने के लिए अधिकारियों से भी बात की। टीम की कार्रवाई को रोकने के लिए नारेबाजी भी हुई तो पुलिस ने स्थानीय पार्षद को हिरासत में लेकर सारंगपुर पुलिस स्टेशन में बिठाकर रखा। यादव ने कहा कि इस तरह से किसी भी धार्मिक स्थल को तोड़ना जायज नहीं है। लोगों की आस्था का भी सम्मान किया जाना चाहिए और धार्मिक स्थलों के लिए जमीन आवंटित की जानी चाहिए। यहां के लोग पिछले काफी समय से धार्मिक स्थलों के लिए जमीन की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रशासन वो मुहैया नहीं करा रहा और लोग जहां पूरा करते हैं, उसे भी तोड़ा जा रहा है।
निगम की जमीन पर 106 अनधिकृत धार्मिक स्थल, बाकी प्रशासन-वन विभाग की जमीन पर
नगर निगम की जमीन पर करीब 106 और बाकी अनधिकृत धार्मिक स्थल प्रशासन और वन विभाग की जमीन पर बने हैं। शहर के डिप्टी कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने हाल ही में हो रही कार्रवाई को लेकर एक समीक्षा बैठक भी की थी। डीसी ने अवैध धार्मिक संरचनाओं के प्रबंधकों/कब्जाधारियों को चार सप्ताह के भीतर अवैध संरचनाओं को हटाने का निर्देश दिया गया था। ऐसा न करने पर प्रशासन की तरफ से कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई थी।
20 अगस्त को अगली सुनवाई, उससे पहले करनी है कार्रवाई
सिविल अपील संख्या-8519/2006 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर कार्रवाई की जा रही है। इस केस का शीर्षक यूनियन ऑफ इंडिया बनाम स्टेट ऑफ गुजरात एंड अन्य है। इसकी निगरानी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से सीडब्ल्यूपी संख्या-17976/2018 में की जा रही है। इसका शीर्षक कोर्ट बनाम स्टेट ऑफ पंजाब एंड अन्य है। यह केस सार्वजनिक व सरकारी भूमि पर अनधिकृत धार्मिक संरचनाओं को हटाने के संबंध में है। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 20 अगस्त को है। उससे पहले निगम और प्रशासन को कार्रवाई पूरी करनी है।