कोरोना महामारी के कारण चार माह बाद बिजली बिल आने पर लोगों को निगम सेस का झटका लगा है। बिल में जब बढ़ा हुआ बजट देखा तो लोगों ने चेक किया कि इस बार बिल में इलेक्ट्रिसिटी सेस के रूप में अलग से चार्ज जोड़ा गया था। हालांकि प्रशासन की ओर से 10 पैसे प्रति यूनिट इलेक्ट्रिसिटी सेस का नोटिफिकेशन हो चुका है। इस सेस का रुपया निगम के पास जाएगा।
विपक्ष के पार्षद देवेंदर सिंह बबला ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि फरवरी माह में इलेक्ट्रिसिटी सेस का विरोध कर सदन से वॉकआउट किया था। उसके बाद कब नोटिफिकेशन हुआ पता नहीं। मार्च के बाद बिजली बिल नहीं आया तो पता नहीं चला, अचानक से जब जुलाई माह का बिजली बिल आया तो पता कि नगर निगम टैक्स के नाम से अलग पैसा जोड़ा गया है।
जब पता किया तो जानकारी मिली कि इलेक्ट्रिसिटी सेस लगाया गया है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग न निगम के पास है और न इसका टैक्स निगम को दिया जा सकता है। भाजपा जबरन टैक्स लगाकर मनमानी कर रही है। वहीं सेक्टर- 19 निवासी नरेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ माह से संपर्क सेंटर में जाकर बिल भर रहा था। आज बिल आया तो पता चला कि इसमें इलेक्ट्रिक सेस जोड़ा गया है।
पांच माह में निगम को मिला 1.70 करोड़ रुपए
शहर में कुल 2 लाख 47 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। पिछले पांच माह में नगर निगम को इलेक्ट्रिसिटी सेस के रूप में 1.70 करोड़ रुपए का फंड मिला है। इलेक्ट्रिसिटी सेस के रूप में बिजली विभाग 10 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से चार्ज कर रहा है।
भाजपा सिर्फ टैक्स लगाती है
भाजपा सिर्फ मनमानी करती है। जब कांग्रेस ने वॉकआउट किया तब भी जबरन टैक्स लगाया गया। जबसे भाजपा सता में आई है सिर्फ टैक्स लगाए जा रहे हैं। -देवेंदर सिंह बबला, नेता प्रतिपक्ष
कांग्रेस का काम सिर्फ आरोप लगाना
कांग्रेस सिर्फ आरोप लगा सकती है। शहर में विकास कार्य के हर फैसले सदन की अनुमति से ही होते हैं। पिछले साल इलेक्ट्रिसिटी सेस की अनुमति भी सदन से पास हुई थी। -राजबाला मलिक, मेयर