इनेलो प्रदेशाध्यक्ष बीरबल दास ढालिया ने कहा कि नैना चौटाला, अनूप धानक, राजदीप फोगाट, और पिरथी सिंह नंबरदार का दल बदलने के ग्यारह महीने बाद त्याग पत्र देना प्रजातंत्र के साथ धोखा है। वास्तविकता यह है कि जब गत वर्ष अक्टूबर माह में इन चारों विधायकों ने जजपा का समर्थन करते हुए उसके गठन के समय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी, तभी से वे दलबदल कानून के प्रावधानों की परिधि में आ गए थे।
अब जब विधानसभा के भंग होने में कुछ ही समय बाकी रह गया है तब उनका त्याग पत्र सदन की गरिमा को चुनौती देने के साथ-साथ प्रजातंत्र के साथ भद्दा मजाक भी है। पिछले ग्यारह महीनों के दौरान वेतन, भत्ता और पेटिग्रांट उन्होंने अनैतिक और गैर-कानूनी तौर पर ली है, उसे लेने का उन्हें कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं था।
सैद्धांतिक रूप से यह सारी रकम उनसे वसूल की जानी चाहिए। यदि ऐसा न किया गया तो भविष्य में यह एक उदाहरण बनेगा। एक तरफ दलबदल कानून निरर्थक होगा और दूसरी तरफ प्रजातंत्र और विधानसभा की गरिमा एवं मर्यादा घटेगी।