डीजीपी के अनुसार रमनदीप, अपने साथियों तरनजोत सिंह उर्फ तन्ना और सतीन्द्र सिंह उर्फ काला के साथ साजिश रचकर नशे और हथियारों की तस्करी का रैकेट चला रहा था। काला, कुछ समय अमृतसर जेल में बंद था, जहां वह एक पाकिस्तानी नागरिक मौलवी उर्फ मुल्ला के संपर्क में आया, जिसने उसकी पाकिस्तानी तस्करों से जान-पहचान करवाई।
गुप्ता ने बताया कि अमृतसर जेल से सतीन्द्र को कपूरथला जेल में तबदील कर दिया गया था, जहां उसने तरनजोत सिंह उर्फ तन्ना से दोस्ती की और उसे अपना साथी बना लिया। काला ने इस रैकेट में बीएसएफ के एक जवान की शमूलियत की जरूरत के बारे में बताने के बाद रमनदीप सिंह ने सुमित कुमार को भी नशा तस्करी के काम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
गिरोह के कामकाज की जानकारी देते हुए डीजीपी ने कहा कि सुमित सरहद पर लगी कंटीली तार, नशा सप्लाई करने वाले स्थानों और अन्य स्थानों की तस्वीरें तन्ना और काला को भेजता था। पूर्व-निर्धारित समय और स्थान पर भारत वाले हिस्से से खेप की सुपुर्दगी के बाद तन्ना के तीन अन्य साथी इसे सुमित कुमार के पास से एकत्रित करते थे।
गुप्ता ने बताया कि जगजीत सिंह उर्फ लाडी नशे की खेपों को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें अपनी स्विफ्ट कार मुहैया करवाता था। डीजीपी ने बताया कि अब तक की गई जांच के आधार पर इन मुलजिमों की तरफ से 42 पैकेट हेरोइन, 9 एमएम की विदेशी पिस्तौल (80 कारतूस और 12 बोर बंदूक के 2 कारतूस) तस्करी किए जाने का शक है। उन्होंने यह भी कहा कि उनको अब तक पाकिस्तान आधारित तस्करों से नशीले पदार्थों की आमद से 39 लाख प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस राशि में से 39 लाख सुमित कुमार द्वारा अपने इन साथियों और रमनदीप सिंह के बीच बराबर बांटने के लिए प्राप्त हुए।
पैसे के लेनदेन पर नजर रखी तो तस्करी के केस उजागर: डीजीपी
पंजाब डीजीपी ने कहा कि पुलिस ने नार्को आतंकवाद सप्लाई चेन तोड़ने के लिए पाकिस्तान, यूएई और भारत के अलग-अलग हिस्सों जैसे कि पंजाब, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली आदि में नशा तस्करी और सप्लाई और पैसों के लेन-देन की रणनीति पर निगरानी रखकर अलग-अलग स्थानों पर सख्त कार्रवाई की, इस तस्कर गिरोह का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है, जोकि आईएसआई और अन्य पाक संस्थाओं की तरफ से आतंकवादी कार्रवाई के लिए वित्तीय सहायता करने के तौर पर सीधी निगरानी अधीन चलाया जा रहा है।