अस्पताल के डॉक्टरों और प्रबंधकों द्वारा बुजुर्ग के साथ की गई इस लापरवाही के विरुद्ध दिलबीर सिंह ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। अदालत ने याचिका को स्वीकार कर मामले की सुनवाई की तारीख 22 जुलाई निर्धारित की है। याचिकाकर्ता ने इस मामले में चीफ सेक्रेटरी पंजाब, निदेशक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग, सिविल सर्जन अमृतसर, जीएनडीएच के एमएस और पुलिस कमिश्नर अमृतसर को वादी बनाया है। पीड़ित के वकील राजीव मल्होत्रा ने कहा कि प्रीतम सिंह की मौत 17 तारीख हो गई थी, डॉक्टरों ने इसकी जानकारी 12 घंटे बाद क्यों दी, यह जांच का विषय है।
वकील राजीव मल्होत्रा और सतिंदर सिंह बोपाराय ने बताया कि इलाज के दौरान जिस महिला की मौत हुई थी, वह कोरोना संक्रमित नहीं बल्कि कैंसर पीड़ित थी। उसके शव को उसी तरह कवर कर भेजा गया, जैसे कोरोना मरीज की मौत के बाद किया जाता है। पदमा के परिजनों ने इस बात की शिकायत पुलिस से कर कार्रवाई की मांग की लेकिन पुलिस ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।
प्रीतम सिंह जिन्दा है!
वकील राजीव मल्होत्रा के अनुसार परिजनों का कहना है कि बुजुर्ग जिंदा हैं। उन्होंने दावा किया कि मृतक महिला के परिजनों ने जिस व्यक्ति का संस्कार किया है वह प्रीतम सिंह का नहीं है, क्योंकि महिला कोरोना संक्रमित नहीं थी। इसके बावजूद उसके शव को पैक कर भेजना कई शंकाएं खड़ी करता है। अंतिम संस्कार करते समय महिला के परिजनों को उसके अंतिम दर्शन क्यों नहीं करने दिए गए। इससे स्पष्ट है कि प्रीतम सिंह का नहीं किसी अन्य के शव का संस्कार किया गया है ।
शवों की अदला-बदली मानवीय त्रुटि थी: प्रिंसिपल
यह मानवीय त्रुटि है। शवों की अदला-बदली नहीं होनी चाहिए थी। वैसे हम आईसीएमआर की हर गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं। इस मामले में चूक हुई है, जिसकी न्यायिक जांच प्रशासन द्वारा करवाई जा रही है। हम अपने स्तर पर भी खोजबीन कर रहे है। भविष्य में कोरोना संक्रमण ग्रस्त व्यक्ति का शव बॉडी मैनेजमेंट के आधार पर भेजा जाएगा। डॉ. राजीव देवगन, प्रिंसिपल, सरकारी मेडिकल कॉलेज, श्री गुरुनानक देव जी अस्पताल