पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदान करने में गड़बड़ी का यह मामला सोनीपत जिले से जुड़ा हुआ है। जिसे अंजाम देने में एससी-बीसी कल्याण विभाग मुख्यालय के कर्मचारियों ने भी अहम भूमिका निभाई है। 13 फरवरी 2019 को जिला कल्याण अधिकारी सोनीपत ने 170 छात्रों को 1 करोड़ 71 लाख 67 हजार 800 रुपये और 18 फरवरी 2019 को 182 छात्रों को 1 करोड़ 81 लाख 42 हजार 700 रुपये की छात्रवृत्ति राशि मंजूरी करने का मामला मुख्यालय को भेजा था।
मुख्यालय स्तर पर प्रशिक्षण शाखा ने छात्रों को ऑनलाइन भुगतान करने के लिए कुल 382 छात्रों की फाइल अतिरिक्त मुख्य सचिव को मंजूरी के लिए भेज दी। अतिरिक्त सचिव से मंजूरी मिलने के बाद छात्रों को राशि ऑनलाइन भेजने की प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों ने पात्र छात्रों के बजाए दूसरे छात्रों के आधार नंबर जोड़ते हुए घोटाला कर डाला।
ये तो संबंधित बैंक की नजर बदले हुए आधार नंबर पर पड़ गई, वरना करोड़ों रुपये का घालमेल हो जाता। विभाग के बड़े अधिकारी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में पहले से इस तरह होते आ रहे घोटाले से भी इनकार नहीं कर रहे हैं।
एससी-बीसी विभाग ने बैंक के सूचित करने पर मुख्य लेखा अधिकारी मुख्यालय अमिता गोयल, उपनिदेशक स्कीम मुख्यालय सतनाम खांबरा, लेखाकार मुख्यालय मोहिता दत्ता और जूनियर प्रोग्रामर मुख्यालय रितु गुप्ता की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया। जांच में पाया गया कि इसमें 353 छात्रों में से केवल सात छात्रों के ही मामले ठीक पाए गए।
दो छात्रों के नाम बदले गए, लेकिन उनके आधार नंबर ठीक पाए गए हैं। बाकि 344 छात्रों की छात्रवृत्ति आधार नंबर बदलते हुए बैंक को भुगतान के लिए भेजी गई है। इस धोखाधड़ी में विभाग के ही कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई। आरोपियों व दोषियों के खिलाफ प्रारंभिक कार्रवाई तो कर दी गई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने पर अलग से कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
दूसरी जगह नौकरी न करने का प्रमाण देने पर मिलेंगे जरूरी भत्ते
मामले में निलंबित किए गए कर्मचारियों को जरूरी भत्ते हर महीने विभाग तभी देगा जब वे ये प्रमाण पत्र देंगे कि कहीं दूसरी जगह नौकरी या निजी बिजनेस नहीं कर रहे हैं। सक्षम पदाधिकारियों की अनुमति बिना निर्धारित किया गया मुख्यालय छोड़ने की अनुमति भी सुरेंद्र, बिलेंद्र, रामधारी व संजीव कुमार को नहीं होगी।