पटियाला निवासी 49 वर्षीय राजिंदर सिंह क्षतिग्रस्त आर्टरी (धमनी) के साथ फोर्टिस अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचे थे। उनकी छाती से काफी ब्लड बह चुका था।
इस दौरान अस्पताल के वस्कुलर सर्जरी के डॉयरेक्टर राजीव जिंदल के नेतृत्व में टीम ने राजिंदर की छाती की मुख्य धमनियों के अंदर स्टंट ग्राफ्ट लगाया। साथ ही लोकल एनेस्थीसिया के प्रभाव में छोटी सी प्रक्रिया से सिर्फ दो दिनों के अंदर वह स्वस्थ होकर घर लौट गए।
कुछ ऐसा ही केस मोहाली के रहने वाले एक और मरीज 67 वर्षीय शंभू नाथ का था। उनके दिमाग की ओर जाने वाली मुख्य धमनी (आर्टरी) में एक उभार था। उनके इलाज के लिए ‘चिमनी प्रक्रिया’ की गई।
जहां दिमाग को ब्लड सप्लाई देने की खातिर दो स्टंट को चिमनी की शेप में फिट किया गया। इसके बाद अब वह पूरी तरह तंदरुस्त हैं।
वीरवार को प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. जिंदल ने बताया कि अगर वे यहां न आते तो कुछ ही घंटों में शायद उन्हें जान गंवानी पड़ती। उन्होंने बताया कि इस तरह के ज्यादातर मरीजों में दूसरी गंभीर बीमारियां भी घर करती हैं। जैसे हृदय रोग, फेफड़ों की दिक्कत, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज।
ये सब बीमारियां ऐसे मरीजों के लिए ओपन चेस्ट ऑपरेशन (चीर-फाड़ से) में मुश्किल पैदा करती हैं। जो कि बीमारी का परंपरागत इलाज है। यहां स्टंट ग्राफ्टिंग ट्रॉमा को कम करती है और रिकवरी जल्द से जल्द होती है।