तीन साल के कार्यकाल में करोड़ों रुपये जुटाए धर्मसोत ने
विजिलेंस के मुताबिक पंजाब के पूर्व वन मंत्री साधू सिंह धर्मसोत, उनके ओएसडी चमकौर सिंह और पत्रकार कमलजीत सिंह द्वारा डीएफओ के तबादले के लिए 10-20 लाख रुपये, रेंजर के लिए 5-8 लाख रुपये, ब्लाक अफसर और वन गार्ड के लिए 2-3 लाख रुपये की रिश्वत लेते थे। इसके अलावा धर्मसोत ने वन मंत्री के तौर पर अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान करोड़ों रुपये इकट्ठा किए। अपने ओएसडी कमलजीत सिंह द्वारा खैर के पेड़ों की कटाई के लिए परमिट जारी करने के बदले एक करोड़ रुपये लिए।
अमित चौहान के रोपड़ में डीएफओ रहते, वह पंचायती जमीनों पर लगाए वृक्षों की संख्या कम दिखाता था और बाकी बचे पेड़ों की कटाई की रकम ठेकेदारों के साथ साझा करता था। इससे पंचायतों के सीधे तौर पर फंड का नुकसान होता था। वह कमलजीत सिंह को भी अवैध माइनिंग करवाने में छूट देता था। इसके अलावा धर्मसोत अपने ओएसडी चमकौर सिंह और कमलजीत सिंह द्वारा वन जमीनों पर रास्ते के बदले एनओसी जारी करने के लिए कॉलोनाइजरों, नए बने फीलिंग स्टेशनों, नए प्रोजेक्टों के मालिकों और होटलों और रेस्तरां से रिश्वत लेता था।
रिश्वत के तौर पर गिलजियां ने लिए 6.40 करोड़ रुपये
विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि हरमोहेंदर सिंह ठेकेदार ने पूर्व वन मंत्री संगत सिंह गिलजियां को मोहाली जिले के गांव नाडा में खैर के पेड़ों की कटाई का परमिट जारी करवाने के लिए कुलविंदर सिंह के मार्फत 5 लाख रुपये रिश्वत दी थी। उसने रेंज अफसर, ब्लाक अफसर और गार्ड को भी रिश्वत दी थी।
पूर्व मंत्री गिलजियां ने अपने कार्यकाल के दौरान हरमोहेंदर सिंह ठेकेदार की पंजाब के डीएफओ के साथ मीटिंग करवाई थी और हिदायत दी थी कि पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्डों की खरीद सिर्फ सचिन कुमार से ही की जाएगी। एक ट्री-गार्ड की कीमत 2800 रुपये थी, जिसमें से गिलजियां का हिस्सा रिश्वत के तौर पर 800 प्रति पेड़ था। उस समय कुल 80000 ट्री-गार्ड खरीदे गए थे और गिलजियां ने 6,40,00,000 रुपये रिश्वत के तौर पर इकठ्ठा किए थे।
प्रवक्ता के अनुसार इस मुहिम का ठेका एक ऐसे ठेकेदार को दिया गया जो पौधों की कीमत उस नर्सरी के खाते में जमा करवा देता था, जिससे पौधे खरीदे जाने थे लेकिन ठेकेदार बिना कोई पौधा खरीदे बाकी 20 प्रतिशत रकम नर्सरी के पास छोड़ कर 80 प्रतिशत नकदी वापस ले लेता था। यह पैसा फिर वन अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच बांटा जाता था। वन अधिकारियों ने धोखे से वन क्षेत्र में लगाई पुरानी कंटीली तारों को कंडम करार दिया और महंगे भाव पर नई कंटीली तारें खरीदने के आदेश दिए।
परमिट के लिए मोहाली के 15 अन्य ठेकेदारों ने भी दी रिश्वत
मोहाली में 15 और ठेकेदार थे, जिन्हें हरमोहेंदर सिंह की तरह ही रिश्वत दी थी। रिश्वत न दिए जाने पर उन्हें परमिट देने से इनकार कर दिया गया या भारी जुर्माने की धमकी देकर परेशान किया जाता रहा। साधु सिंह धर्मसोत को अदायगी खन्ना के निवासी कमलजीत सिंह द्वारा की गई, जो एक पत्रकार है। अमित चौहान ने रोपड़ में बतौर डीएफओ 1160 पेड़ों की कटाई का परमिट 5 लाख 80 हजार देकर दिया था।
मोहाली में ऐसे चलता था रिश्वत का खेल
मोहाली के वन अधिकारी रिश्वत के बदले जिले की पहाड़ियों के कुदरती रास्ते को लेवल करवा देते थे। कुछ समय पहले मोहाली के गांव नाडा में दिलप्रीत सिंह, वन गार्ड और अन्य वन अधिकारियों की मिलीभगत से पक्की सड़क बनाने के लिए पहाड़ी क्षेत्र को लेवल किया गया था। एसएस गिलजियां के कार्यकाल के दौरान अमित चौहान को डीएफओ रोपड़ नियुक्त किया गया और उस समय बेला के नजदीक गांव जिंदा में 486 एकड़ जमीन में से एक महीने में ही अवैध माइनिंग की गई। गांव में करीब 50 फुट गहरे गड्ढे खोदे गए। सरपंचों की मिलीभगत से 40-50 करोड़ रुपये की अवैध माइनिंग की गई थी, जिनमें से एक का नाम एफआईआर में दर्ज किया गया था, जो बाद में रद्द कर दिया गया था।