कैप्टन ने भी उन पर भरोसा जताने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का आभार जताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह पंजाब में पार्टी को मजबूत करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे। गौरतलब है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पिछले साल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस छोड़ दी थी।
उन्होंने अपने खुद के राजनीतिक संगठन, पंजाब लोक कांग्रेस की स्थापना की, जिसने भाजपा के साथ गठबंधन में फरवरी 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की लहर के चलते कैप्टन की पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई और भाजपा को भी केवल दो सीटें ही मिलीं लेकिन इसके बावजूद वह अपनी राष्ट्रवादी साख पर मजबूती से डटे रहे और उन्होंने न केवल किसान आंदोलन पर केंद्र सरकार के फैसलों का पक्ष लिया बल्कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन भी किया।
इससे पहले, ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में 1984 में संसद और कांग्रेस पार्टी से उन हालात में इस्तीफा दे दिया, जब इंदिरा गांधी जैसी प्रतिभा की अवहेलना करना कोई सामान्य फैसला नहीं था। इसके दो साल बाद श्री दरबार साहिब में पुलिस के घुसने पर उन्होंने फिर से बरनाला सरकार से इस्तीफा दे दिया था। 2004 में कैप्टन ने पंजाब का पानी बचाने के लिए पंजाब विधानसभा में पिछले सभी जल बंटवारे समझौतों को रद्द करते हुए अपना मुख्यमंत्री पद दांव पर लगाया और पंजाब के पानी के लिए अपनी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का भी विरोध किया।
कैप्टन और भाजपा की सोच मिलती है: तोमर
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि पहले से ही कैप्टन और भाजपा की सोच मिलती है, क्योंकि भाजपा की नीति है कि पहले राष्ट्र बाद में पार्टी। उन्होंने कहा कि कैप्टन हमेशा से ही राष्ट्रवादी सोच के मालिक रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र को पहले और पार्टी को बाद में रखा। उन्होंने कहा कि कैप्टन का भाजपा में आना इस बात के संकेत है वह कि पंजाब में शांति व सुरक्षा के पक्षधर हैं।
राज्य और देश की रक्षा हमारा कर्तव्य: कैप्टन
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है। उन्होंने कहा कि मैंने पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों को बिगड़ते देखा है। पंजाब में पूरी तरह से अराजकता पैदा करने के लिए ड्रोन अब हमारे क्षेत्र में आ रहे हैं। चीन भी हमसे दूर नहीं है। अपने राज्य और देश की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।