अस्वस्थ होने के कारण लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह गुरुवार को वीडियो संदेश के जरिये पंजाब में कांग्रेस के पक्ष में सामने आए। उन्होंने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के पक्ष में लोगों से मतदान की अपील करने के साथ ही केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि पंजाब के सामने बड़ी चुनौतियां हैं, जिनका मुकाबला बहुत जरूरी है। पंजाब के विकास की समस्या, खेती में खुशहाली का मुद्दा और बेरोजगारी की समस्या को सुलझाना बहुत जरूरी है और यह काम सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही कर सकती है। उन्होंने पंजाब की जनता से अपना वोट कांग्रेस पार्टी को ही देने की अपील की।
डॉ. मनमोहन सिंह का यह वीडियो पार्टी के पंजाब मामलों के प्रभारी हरीश चौधरी ने पंजाब कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जारी किया। वीडियो में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि देश एक अहम मोड़ पर खड़ा है। उनकी बहुत इच्छा थी कि वह पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, उत्तर प्रदेश और मणिपुर के भाई-बहनों से मिलकर देश के हालात पर चर्चा करते लेकिन डॉक्टरों की राय मानते हुए उनके लिए वीडियो संदेश के जरिये बात करना ही संभव हो सका है।
उन्होंने कहा कि कोरोना की मार के बीच केंद्र सरकार की अदूरदर्शी नीतियों की वजह से एक तरफ लोग गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं, दूसरी तरफ देश के मौजूदा हुक्मरान साढ़े सात साल सरकार चलाने के बाद भी अपनी गलतियों को सुधारने के बजाय पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री पद की विशेष गरिमा होती है और इतिहास को कसूरवार ठहराने से अपने गुनाह कम नहीं हो सकते। उन्होंने आगे कहा- ‘प्रधानमंत्री के रूप में मैंने 10 साल तक काम करते हुए खुद ज्यादा बोलने के बजाय मेरे काम के बोलने को प्राथमिकता दी।
हमने कभी अपने राजनीतिक फायदे के लिए देश को नहीं बांटा, कभी सच पर पर्दा डालने की कोशिश नहीं की, कभी देश और पद की गरिमा कम नहीं होने दी। मुझे इस बात का संतोष है कि मुझ पर ‘मौनमोहन’, कमजोर और भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाने वाले भाजपा के दुष्प्रचार की कलई खुल चुकी है और देश 2004 से 2014 के दौरान किए गए हमारे अच्छे कामों को याद कर रहा है।’
भाजपा ने पंजाब व चन्नी को बदनाम करने की कोशिश की
डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री की सुरक्षा के नाम पर मुख्यमंत्री चन्नी और पंजाब के लोगों को भाजपा द्वारा बदनाम करने का प्रयास किया गया। इसे किसी भी लिहाज से एक सही परिपाटी नहीं माना जा सकता। यह भी देखने में आया कि किसान आंदोलन के दौरान भी पंजाब और पंजाबियत को बदनाम करने की कोशिश की गई। जिन पंजाबियों के साहस, शौर्य, देशभक्ति और त्याग को पूरी दुनिया सलाम करती है, उन पंजाबियों के बारे में बहुत कुछ कहा गया। उन्होंने कहा- ‘पंजाब की बहादुर मिट्टी से उपजे एक सच्चे भारतीय के रूप में मुझे उस पूरे घटनाक्रम से पीड़ा हुई है।’
भाजपा सरकार को अर्थव्यवस्था की समझ नहीं: मनमोहन
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार को अर्थव्यवस्था की जरा भी समझ नहीं है। इनकी गलत आर्थिक नीतियों की वजह से देश आर्थिक संकट की गिरफ्त में फंस चुका है। पूरे देश में बेरोजगारी अपने चरम पर है। किसान, कारोबारी, छात्र, महिलाएं सब परेशान हैं, देश के अन्नदाता दाने-दाने के लिए मोहताज हो रहे हैं। देश में सामाजिक असमानता बढ़ रही है। लोगों पर कर्ज लगातार बढ़ रहा है, वहीं कमाई घट रही है। लेकिन यह सरकार आंकड़ों की बाजीगरी करके सब कुछ ठीक होना बता रही है।
मोदी सरकार की नीति और नियत में खोट
र्पू्व पीएम ने कहा कि मोदी सरकार की नीति और नियत दोनों में खोट है। हर नीति में स्वार्थ है, वहीं नीयत में नफरत और बंटवारा। अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए लोगों को जाति-धर्म और क्षेत्र के नाम पर बांटा जा रहा है, उन्हें आपस में लड़ाया जा रहा है। इस सरकार का नकली राष्ट्रवाद जितना खोखला है, उतना ही खतरनाक। इनका राष्ट्रवाद ‘बांटो और राज करो’ की अंग्रेजी नीति पर टिका हुआ है। जो संविधान हमारे लोकतंत्र का आधार है, उस संविधान में इस सरकार की जरा भी आस्था नहीं है। सांविधानिक संस्थाओं को लगातार कमजोर किया जा रहा है।
ऐसे नहीं सुधरते रिश्ते: मनमोहन
डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि मसला केवल देश के अंदर की समस्या का नहीं है, विदेश नीति के मोर्चे पर भी मोदी सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है। चीनी सैनिक हमारी धरती पर एक साल से बैठे हैं, पर उस मामले को दबाने की कोशिश हो रही है। पुराने दोस्त हमसे लगातार छिटक रहे हैं, वहीं पड़ोसी देशों से भी हमारे रिश्ते खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा- ‘मैं उम्मीद करता हूं कि अब सत्ता के हुक्मरानों को समझ में आ गया होगा कि देशों के रिश्ते नेताओं से जबरदस्ती गले मिलने, उन्हें झूला-झुलाने या बिन बुलाए बिरयानी खाने पहुंच जाने से नहीं सुधरते हैं।’