पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। 35 साल से अधिक समय तक उनके साथ काम कर उन्हें जानने का सौभाग्य मिला। वह ज्ञान के भंडार, चलते-फिरते एनसाइक्लोपीडिया थे। हर मुद्दे पर उनका बहुत योगदान था। वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्ताकार के रूप में श्रेष्ठ थे। हर काम को बड़ी ही सहजता एवं आसानी से अंजाम देते थे। उनका जाना एक शून्य है, जिसे कभी भी भरा नहीं जा सकेगा।
प्रणब मुखर्जी के निधन पर भाजपा नेताओं ने जताया दुख
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर प्रदेश भाजपा के नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि प्रणब मुखर्जी भारतीय राजनीति के वह ऊर्जा स्तंभ थे, जिनका आभामंडल सत्ता के गलियारों से लेकर विपक्ष के कार्यालयों तक था। शायद ही कोई ऐसा राजनीतिज्ञ हो, जो प्रणब दा का पिता तुल्य सम्मान न करता हो।
वहीं, पूर्व सांसद और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सत्यपाल जैन ने कहा कि प्रणब मुखर्जी के उनके साथ बहुत ही अच्छे संबंध थे। उनके लोकसभा के कार्यकाल के दौरान प्रणब मुखर्जी गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे और वह उसके सदस्य थे। उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी सदैव दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करते थे। उनका चले जाना समूचे राष्ट्र के लिए कभी न पूरी होने वाली क्षति है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, पार्षद देवेश मोदगिल समेत अन्य नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर शोक व्यक्त किया।