प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने धन शोधन के एक मामले में यमुना नगर स्थित पूर्व विधायक दिलबाग सिंह के आवास पर पिछले दिनों छापामारी की थी। पांच दिन चली छापेमारी के बाद आरोपी पूर्व विधायक दिलबाग सिंह और उनके करीबी खनन कारोबारी कुलविंद्र राणा को गिरफ्तार किया गया था।
यमुनानगर के पूर्व विधायक दिलबाग सिंह की गिरफ्तारी और रिमांड के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बड़ी किरकिरी हुई। हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी व इसके बाद ईडी अदालत की ओर से दी गई रिमांड को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है।
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दिलबाग सिंह ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार करने के आदेश को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। दिलबाग सिंह को कई दिन की कार्रवाई के बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था। हरियाणा के अलग-अलग ठिकाने में चार जनवरी की सुबह प्रवर्तन निदेशालय की अलग-अलग टीमों ने करनाल, सोनीपत और यमुनानगर में दबिश दी थी।
यमुनानगर में पूर्व विधायक दिलबाग सिंह के घर पांच दिन चली प्रवर्तन निदेशालय की करवाई दिलबाग सिंह की गिरफ्तारी के साथ खत्म हुई। उनके आवास से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी उन्हें गाड़ी में बैठाकर दिल्ली ले गए। इनेलो के नेता और पूर्व विधायक दिलबाग सिंह और उसके सहयोगी के घर से पांच करोड़ रुपये कैश, चार विदेशी निर्मित हथियार 100 से अधिक शराब की बोतलें और 4-5 किलोग्राम सोना बरामद हुआ था। वह 2009 में पहली बार इनेलो से विधायक बने। चार साल पहले दिलबाग सिंह अभय सिंह चौटाला के समधी बने थे।
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इस कार्रवाई, गिरफ्तारी व रिमांड के आदेश को दिलबाग सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और तुरंत रिहाई का आदेश जारी करने की अपील की थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ईडी की कार्रवाई शुरू से ही अवैध थी। ईडी को उन्हें 24 घंटे के भीतर अदालत के सामने पेश करना चाहिए था जो नहीं किया गया। उनकी गिरफ्तारी के दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसके साथ ही ईडी की अदालत ने भी उनकी रिमांड का आदेश जारी करते हुए विवेक का सही प्रकार से इस्तेमाल नहीं किया। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए ईडी की गिरफ्तारी व रिमांड के आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।