लाठर की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे रोहतक रेफर कर दिया। रात को उपचार के दौरान पूर्व मंत्री की मौत हो गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को करीब 12 बजे जुलाना में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उनकी अंतिम यात्रा में विधायक जगबीर मलिक, पूर्व मंत्री कुलबीर सिंह, प्रो. धर्मेद्र ढुल, जगबीर ढिगाना, जिला युवा उपाध्यक्ष रोहित दलाल, प्रदेश सचिव धर्मपाल कटारिया, सरपंच एसोसिएशन के प्रधान राजेश गोयत, सत्यवान खटकड़, मार्केट कमेटी चेयरमैन विष्णु शर्मा, कांग्रेस नेता मनजीत लाठर, आनंद लाठर, सितेंद्र ढुल, बसाऊ लाठर, दिनेश जामनी, जुलाना थाना प्रभारी रोहताश ढुल समेत हजारों लोगों मौजूद थे।
अंतिम यात्रा में शामिल लोग
सत्यनारायण लाठर का जीवन संघर्ष भरा रहा है। 19 वर्ष की आयु में वर्ष 1977 में सत्यनारायण लाठर राजनीति में आए थे। एक कार्यकर्ता के रूप में समर्पित सत्यनारायण लाठर के जुनून व उत्साह को देखकर 1989 में उपप्रधानमंत्री देवीलाल अचानक बिना किसी कार्यक्रम के सत्यनारायण लाठर के घर पहुंच गए थे। लाठर की दयनीय पारिवारिक स्थिति और उत्साह को देखकर उपप्रधानमंत्री रहे देवीलाल ने उन्हें कान्फेड का चेयरमैन बना दिया था।
वर्ष 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी से विधायक बने थे। चौधरी बंसीलाल की सरकार में जनस्वास्थ्य मंत्री बने। सत्यनारायण लाठर हलके के विकास के लिए 286 करोड़ रुपये उस समय मुख्यमंत्री रहे बंसीलाल से लेकर आए थे और जुलाना का नया बस स्टैंड व रामकली माइनर का निर्माण कार्य समेत दर्जनों विकास कार्य करवाए। इसके बाद उन्होंने इनेलो का दामन थाम लिया था।
इनेलो से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वर्ष 2014 में बीरेंद्र सिंह के साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। करीब दो वर्ष के बाद भाजपा को छोड़कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ कांग्रेस में आ गए थे।
1995 में सड़क हादसे में सत्यनारायण लाठर के बेटे संजय की मौत हो गई थी। उस समय संजय करीब 19 वर्ष के थे और अविवाहित थे। इसके बाद वर्ष 2007 में उनके दूसरे लड़के जितेंद्र का भी निधन हो गया था। 26 नंवबर 2016 को सत्यनारायण के पोते एवं जितेंद्र के बेटे रोहित की भी अचानक बीमारी से मौत हो गई। अब केवल परिवार का एक चिराग बचा है। सत्यनारायण लाठर की मौत के बाद परिवार में विधवा पुत्रवधू और सत्यनारायण लाठर की पत्नी और एक 18 साल का पोता जितेंद्र का बेटा मोहित बचा है।