जस्टिस मार्कंडेय काटजू की अगुवाई वाले पब्लिक कमीशन की रिपोर्ट का आम आदमी पार्टी ने स्वागत किया है। साथ ही मांग की है कि रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया जाए। आप नेता सुखपाल खैरा ने कहा कि अक्तूबर-2015 में बहबल कलां में हुई फायरिंग की जांच के लिए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जस्टिस काटजू की अगुवाई में लोक आयोग गठित किया था।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस काटजू एक ईमानदार छवि वाले समाजसेवी हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के बाद बहबलकलां में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी। इसी मामले की जांच को जस्टिस काटजू आयोग गठित किया गया था। हैरानी की बात है कि राज्य सरकार उन बेकसूर लोगों के कातिलों की पहचान करने में असफल रही है। आज भी बहबलकलां गोली कांड की एफआईआर में अज्ञात लोगों का ही नाम है। खैरा ने कहा कि यह कानून के साथ मजाक है, क्योंकि गोली चलाने वाले खुद पुलिसकर्मी थे। लोगों केगुस्से को देखते हुए बादल सरकार ने जस्टिस जोरा सिंह आयोग गठित कर दिया। हालांकि ऐसे आयोगों से क्लीन चिट लेना सीएम की आदत बन चुकी है। आम आदमी पार्टी जोरा सिंह आयोग को नकारती है, क्योंकि इसे सिर्फ दोषियों को बचाने के लिए बनाया गया है। खैरा ने मांग की है कि सरकार जस्टिस काटजू आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करे। उन्होंने कहा कि काटजू आयोग की ओर से पुलिस अफसरों पर सख्त कार्रवाई की भी पार्टी हिमायत करती है, जिन्होंने मजिस्ट्रेट के मौजूद न होने के बावजूद फायरिंग के आदेश दिए। उन्होंने मांग की कि फरीदकोट के तत्कालीन एसएसपी की कॉल डिटेल्स भी सार्वजनिक की जाए, ताकि यह पता चल सके कि फायरिंग के आदेश किसने दिए थे।