पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई कस्टडी से फरार होने के मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व जज सुरिंदर भारद्वाज को बड़ी राहत देते हुए सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई एक वर्ष कैद और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा पर रोक लगाते हुए अपील एडमिट कर ली है।
यह पहला केस नहीं था जिसमें भारद्वाज को दोषी करार दिया गया हो। करीब 9 साल पहले भी भारद्वाज को रिश्वत के एक केस में कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई थी। उस केस में भारद्वाज ने सजा के फैसले के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। इसी रिश्वत केस में जब सीबीआई उनके घर पर सर्च कर रही थी, तो वे सीबीआई को चकमा देकर वहां से फरार हो गए थे।
उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 224 के तहत केस दर्ज किया गया था। करीब 15 साल पुराने इस मामले में निचली अदालत ने 4 साल पहले भारद्वाज को बरी कर दिया था। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन ने सेशन कोर्ट में अपील दायर कर दी थी। सेशंस कोर्ट ने 21 सितंबर को लोअर कोर्ट के फैसले को पलटते हुए भारद्वाज को दोषी करार दे यह सजा सुनाई थी।
सजा के इसी फैसले को भारद्वाज ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगाते हुए कहा कि वह इस मामले में पहले ही 9 महीने 26 दिनों की सजा काट चुके हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का एक मामला और चल रहा है। इस मामले में उन्हें जमानत मिल चुकी है। ऐसे में हाईकोर्ट ने भारद्वाज की सजा पर रोक लगाते हुए उनकी अपील को एडमिट कर लिया है।