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1300 चीनी सैनिकों को पटक-पटक के मारने वाले पूर्व सैनिक बोले- रेजांगला को चीन याद रखे

Thu, 18 Jun 2020 01:57 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रेवाड़ी/ कोसली/ खोल (हरियाणा)

सार

  • 120 में 114 सैनिकों ने दी थी शहादत, 6 सैनिक बचे थे जिंदा
  • चीन को धूल चटाने वालों में दक्षिण हरियाणा और राजस्थान के रणबांकुरे थे शामिल
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रेजांगला युद्ध। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा(एलएसी) पर गलवां खाटी में हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों के शहीद होने से सैनिकों की खान कहे जाने वाले रेवाड़ी के पूर्व सैनिकों का गुस्सा भी चरम पर है। रेजांगला पोस्ट पर अहीरवाल के 120 सैनिकों द्वारा चीन के 1300 सैनिकों को ढेर कर दिया गया था। 

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चीनियों को ढेर कर चुके योद्धाओं का कहना है कि एक भारतीय सैनिक 10 चीनियों के बराबर है। ऐसे में एक बार भारतीय सैनिकों को छूट मिले तो सेना घर में घुसकर मारने में सक्षम है। 1962 से से लेकर कारगिल तक युद्धों में अपनी वीरता का पराक्रम दिखा चुके रणबांकुरों का कहना है कि जिंदगी के अंतिम पड़ाव में होने के बावजूद वे चीनियों को एक बार फिर से धूल चटाने को तैयार हैं। 

पूर्व सैनिकों ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि चीन 1962 वाला भारत आंकने की गलती न करे। देश के जांबाज सैनिक किसी भी परिस्थिति ने निपटने के लिए सक्षम हैं। देश को जरूरत पड़ी तो पूर्व सैनिक बॉर्डर पर जाकर दुश्मन को धूल चटाने के लिए तैयार हैं। पूर्व सैनिक कल्याण संगठन मनेठी के पूर्व सैनिकों में रोष है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि 1962 की लड़ाई को शायद चीन भूल गया है। अगर चीन नहीं माना तो हमारी सेना चीनी सैनिकों को सबक सिखाने से गुरेज नहीं करेगी। 
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सेना के हाथों को खोलने का है समय : कैप्टन ओमप्रकाश
मनेठी निवासी कैप्टन ओमप्रकाश ने कहा कि चीन की हरकत कायरता पूर्ण है। अब समय आ गया है और सेना के हाथों को पूरी तरह से खोल देना चाहिए। चीन शायद 1962 की लड़ाई को भूल गया है, जिसमें भारतीय सैनिकों ने रेजांगला चोटी पर एक दिन में चीन के 1300 सैनिकों को सफाया किया था। अगर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है तो उसे सबक सिखाने का समय एक बार फिर आ गया है। पूर्व सैनिक अब भी बार्डर पर जाकर अपने देश के लिए लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

चीन को सबक सिखाने का है यह समय: सूबेदार रामपाल

नायब सूबेदार रामपाल प्राणपुरा ने कहा कि शायद चीन व पाकिस्तान भारतीय जाबांजों को भूल गया है। हमारे सैनिक जब अपने पराक्रम पर आते हैं तो दुश्मन को मुंह छिपाकर भागना पड़ता है। यह समय बयानबाजी नहीं पूरे भारत का एकजुट होकर चीन को सबक सिखाने का है। सेना अपने वीर शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देगी। 

बातचीत से नहीं निकलेगा हल, सेना को दें छूट : सूबेदार नरेश मनेठी
सूबेदार नरेश मनेठी ने कहा कि अब हमारा भारत 1962 वाला भारत नहीं रहा है। शायद चीन को बताना जरूरी है। जब हमारे सेना अपनी पर आती है तो वह घर में घुस कर मारती है। भारतीय सैनिक पीछे मुड़कर नहीं देखते हैं। आज का भारत हर परिस्थितियों में लड़ना जानता है। पूर्व सैनिक आज भी बार्डर पर जाने को तैयार हैं। हमारे देश के प्रधानमंत्री से आग्रह है कि बातचीत से हल नहीं निकलता है तो भारतीय सेना को पूरी तरह से छूट दी जाए।

आज का भारत है मजबूत: हवलदार विजय सिंह
हवलदार विजय सिंह ने कहा कि चीन भरोसे के लायक नहीं है। यह बातचीत की भाषा को नहीं समझता। चीन 1962 का वो दिन भूल गया, जब भारत के 120 सैनिकों ने रेजांगला चोटी पर 1300 चीनी सैनिकों को सफाया कर तिरंगा फहराया था। चीनी सैनिकों की यह हरकत कायराना है। भारतीय सेना इसका मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।  

चीन को सबक सीखने में हम सक्षम : हवलदार बलबीर सिंह

1962 में चीन के साथ युद्ध लड़ चुके हवलदार बलबीर सिंह ने कहा कि शहीदों की शहादत का बदला हर हाल में लेना चाहिए। देशभर के पूर्व सैनिकों में उबाल है। चीन को उसी की भाषा में जवाब देने का समय आ गया है। आज भारत विश्व की उभरती महाशक्ति है। हर दृष्टि से सक्षम है अब अपनी ताकत दिखाने का समय आ गया है। 

चीन को सबक सीखाने के लिए तैयार हूं: सूबेदार मेजर सोहनलाल
सूबेदार मेजर सोहन लाल ने बताया कि 1962 में भी चीन ने मुंह की खाई थी। आज फिर से भारतीय सैनिकों पर हमला कर कायरता का परिचय दिया है। 90 की उम्र में भी सरकार अवसर दे तो वे चीन को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं। पूर्व सैनिक जब भी जरूरत पड़ेगी जंग में कूदने को तैयार हैं। 

रेजांगला से भी चीन ने नहीं लिया सबक: कैप्टन डॉ. सुचेता
कैप्टन डॉ. सुचेता ने कहा कि चाइना को देश के बहादुरों ने रेजांगला में जो सबक सिखाया था उसे शायद भूल गया है। भारतीय सेना पूरी तरह से हर स्थिति से निपटने में सक्षम है। अब सेना को खुली छूट देनी चाहिए। 
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रेजांगला वीरों ने ताकत से जीती थी जंग: मंगल सिंह

पूर्व स्वतंत्रता सेनानी 92 वर्षीय मंगल सिंह ने कहा कि पहले लड़ाई ताकत से जीती जाती थी। आज देश सैनिक हर मामले में अव्वल हैं। साधन संपन्न सेना किसी भी स्थिति से निपटने में तैयार है। दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देना होगा। 

शहादत का बदला लेने का मिले अवसर: हवलदार सुनील चौहान
हवलदार सुनील चौहान ने कहा कि सीमा की तरफ आंख उठाने वालों को जरूर सबक सिखना चाहिए। पहले भी भारतीय सेना के जवानों ने अपनी वीरता को साबित किया है। चीने से देश किसी भी सूरत में भरोसे के लायक नहीं है। सेना के जवान हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। किसी भी स्थिति में मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। 

अवसर मिला को दुश्मन को चटा देंगे धूल: सूबेदार रामकुमार
भारत-पाक युद्ध में भाग ले चुके सूबेदार रामकुमार ने बताया कि इस घटना से पूर्व सैनिकों के खून में भी उबाल आ गया है। उनकी भुजाएं दो-दो हाथ करने को फड़क रही हैं। अगर अवसर मिला तो एक बार फिर से देश की रक्षा के लिए बॉर्डर पर जाकर दुश्मन से लोहा लेकर उसे धूल चटाने को तैयार हैं। 
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