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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को उच्च न्यायालय से बड़ा झटका, दोनों याचिकाएं खारिज

Tue, 08 Sep 2020 11:15 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • अग्रिम जमानत और जांच सीबीआई से करवाने से जुड़ी अपील वाली याचिकाएं उच्च न्यायालय ने की खारिज
  • 5 घंटे की सुनवाई के बाद सैनी को बिना कोई राहत दिए सोमवार को न्यायालय ने फैसला रखा था सुरक्षित
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की अग्रिम जमानत याचिका तथा जांच सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी से करवाने की मांग को लेकर दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सैनी को बड़ा झटका दिया है। अग्रिम जमानत की मांग खारिज होने के बाद अब सैनी पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।

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सोमवार को जस्टिस फतेहदीप सिंह ने सैनी के वकील सीनियर एडवोकेट एपीएस देओल और पंजाब सरकार द्वारा इस मामले के लिए नियुक्त स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर सरतेज सिंह नरुला दोनों की ओर से दी गई दलीलों को उच्च न्यायालय में 5 घंटे तक सुना था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस फतेहदीप सिंह ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए मंगलवार सुबह अपना फैसला सुनाए जाने का आदेश देते हुए सुनवाई मंगलवार 8 सितंबर तक स्थगित कर दी थी। मंगलवार सुबह उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाते हुए सैनी की दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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1991 के बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी आरोपी हैं। पहली याचिका में सैनी ने मामले की पंजाब से बाहर किसी अन्य जांच एजेंसी या सीबीआई से जांच की मांग की थी। सैनी ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ मोहाली पुलिस ने मटौर थाने में 6 मई को एफआईआर दर्ज की है। 

यह पूरी तरह से राजनीतिक रंजिश के तहत दायर की गई है। इस एफआईआर पर पंजाब पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है, लिहाजा इस मामले की सीबीआई या राज्य के बाहर की किसी जांच एजेंसी से जांच करवाई जाए। दूसरी याचिका सैनी ने मोहाली की ट्रायल कोर्ट द्वारा 1 सितंबर को उनकी अंतरिम जमानत को खारिज किए जाने के खिलाफ दायर की है। 

सैनी ने न्यायालय से अग्रिम जमानत की अपील की है। इस याचिका में सैनी ने कहा है की एफआईआर जिस घटना से जुड़ी है, वह 29 साल पुरानी है। इस घटना को लेकर जिस पूर्व पुलिसकर्मी ने आरोप लगाए थे वह भी अब 5 वर्ष पुराने हो गए हैं। इस मामले में मोहाली जिला अदालत उन्हें पहले 11 मई को अग्रिम जमानत भी दे चुकी थी।

बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में धारा-302 को भी जोड़ दिया और अब मोहाली की ट्रायल कोर्ट ने 1 सितंबर को उन्हें दी गई अंतरिम जमानत खारिज कर दी है। सैनी का आरोप है कि उनके खिलाफ यह पूरा मामला राजनीतिक रंजिश के तहत ही दर्ज किया गया है।
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