हरियाणा के पचास हजार कच्चे और लगभग पांच हजार पक्के कर्मचारियों के समर्थन में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा उतर आए हैं। उनकी सरकार में 2014 में बनाई गई नियमितीकरण नीतियों को हाईकोर्ट के रद्द करने से ही इन कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ी हुई है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने बीते 31 मई को नियमितीकरण नीतियां रद्द करते हुए छह महीने में कच्चे कर्मचारियों की जगह पक्की भर्ती करने के आदेश सरकार को दिए थे।
सरकार पक्की भर्ती इतने बड़े पैमाने पर इतने कम समय में नहीं कर पाई। सरकार को मानसून सत्र में ही प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी विधयेक लाकर बचानी चाहिए थी। सरकार ने अपने स्तर पर ही सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने का निर्णय ले लिया। जिस पर न तो आज तक सुनवाई हुई, न ही फैसले पर स्टे मिला। 30 नवंबर को हाईकोर्ट का निर्णय आए छह महीने पूरे हो रहे हैं। ऐसे में अगर बचे हुए दिनों में स्टे नहीं मिला तो कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।
हुड्डा ने कहा कि सरकार बिना देरी किए कर्मचारियों की नौकरी बचाने के लिए अध्यादेश लाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जल्दी सुनवाई की याचिका दायर कर 30 नवंबर से पहले स्टे भी ले। हुड्डा ने कहा कि सरकार जब मानसून सत्र में बिल लाने को तैयार हो गई थी, ड्राफ्ट भी सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा को सुझावों के लिए भेज दिया गया था, फिर उस पर यू-टर्न क्यों मारा गया। अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, सरकार हजारों परिवारों के मुंह से निवाला छिनने से बचा सकती है।