सेना से रिटायरमेंट के बाद री इंप्लायमेंट में पूर्व सैनिक पे-सीनियोरिटी चाहते है। उनका ये प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है, जिस पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय विचार कर रहा है। पूर्व सैनिकों की ये मांग काफी समय से चल रही है। पीएमओ ने भी पूर्व सैनिकों के संघ को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इस मुद्दे पर निर्णय लेने के बाद उन्हें सूचित कर दिया जाएगा।
दरअसल, साठ साल से पहले फौज से रिटायरमेंट के बाद बहुत से पूर्व सैनिक प्राइवेट रोजगार को अपनाते हैं, तो बहुत से सरकारी सेक्टर में ही री-इंप्लायमेंट की तलाश करते हैं। समय से पहले इस रिटायरमेंट के बाद सरकारी सेक्टर में री-इंप्लॉयमेंट के दौरान पूर्व सैनिकों का अंतिम वेतन संरक्षित रहे, इसके लिए वेतन निर्धारण को लेकर नियम भी बने और उनमें समय-समय पर संशोधन भी होता रहा।
लेकिन कई अर्ध सरकारी विभागों में इन नियमों को आज भी पूर्णतया लागू नहीं किया जा रहा है, जिसका राजस्व नुकसान पूर्व सैनिकों को झेलना पड़ता है। इसी वजह से आल इंडिया एक्स सर्विसमैन बैंक इंपलाइज फेडरेशन ने इससे संबंधित एक प्रस्ताव संज्ञान के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा हुआ है। जिसमें फेडरेशन ने पूर्व सैनिकों की लैंथ ऑफ सर्विस के हिसाब से पे-सीनियोरिटी की मांग की है।
फेडरेशन के महासचिव वेंकटेश नारायण ने बताया कि पीएमओ कार्यालय से फेडरेशन को सूचित किया गया है कि मामला केंद्रीय वित्त मंत्रालय में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि इस मसले पर वे केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से भी विस्तार से चर्चा कर चुके हैं। उनके अनुसार यह लाभ हिमाचल प्रदेश में शिक्षकों को दी जा रही है।