पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि समाज आज भी धार्मिकता और कठोर राष्ट्रवाद नामक दो महामारियों का सामना कर रहा है। इससे शांति, सद्भाव और मानव सुख कम हो रहा है। यह महामारियां हमेशा सभी धार्मिक विश्वासों का हिस्सा रही हैं। शुरू से लेकर आज तक स्थिति वैसी ही है। पहले गुरु नानक देव जी ने समाज व वर्गों को इस चीज से बाहर निकालने को काम किया। शांति, सद्भाव का पाठ पढ़ाया।
वे वीरवार को सेंटर फॉर रिसर्च एंड रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट (क्रिड) की ओर से श्री गुरुनानक देव जी के 550वीं प्रकाशोत्सव पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान में बोल रहे थे। इस अवसर पर अंसारी ने श्री गुरुनानक देव जी ने शिक्षा का नया रास्ता लोगों को दिखाया। इस पर चलकर लोग आगे बढ़ रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे न अपनाकर पीछे छूट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद को अपनी निजी इच्छाओं से ऊपर समझना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो स्थिति विस्फोटक होगी। उन्होंने गुरुनानक जी के दर्शन, प्रसार शांति, सद्भाव और मानव सुख पर पर प्रकाश डालते हुए कहा, मानवता केवल तभी बचाई जा सकती है जब इन दोनों महामारियों को सामूहिक अनुभव के साथ समझा जाए। यह पहचानने की जरूरत है कि धर्म राजनीति नहीं है, धार्मिकता धर्म नहीं है।
इसके लिए एक प्रभावी संवाद और व्यक्तिगत से अधिक भागीदारी की आवश्यकता है। इसके लिए आधुनिक धर्मनिरपेक्ष राज्य और मानवाधिकारों के लिए सम्मान द्वारा सुनिश्चित सांस्कृतिक मूल्यों को समझने की एक भाषा की आवश्यकता है। यह गुरु नानक देव के संदेश और शिक्षाओं में परिलक्षित होता है।
पर्यावरण नष्ट हुआ तो नहीं रहेगा मानव : मुरली मनोहर जोशी
पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने ओंकार सतनाम के साथ विचार रखे। उन्होंने वर्तमान अशांत दुनिया में कड़ी मेहनत, साझेदारी, एकता की भूमिका और शांति, सद्भाव और खुशी में इसके परिवर्तन के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि श्री गुरु नानक देव के समय समाज विघटित था, लेकिन उन्होंने परिश्रम कर अच्छी शिक्षा दी और लोग अपनाकर आगे बढ़ते गए।
उन्होंने पर्यावरण और ईश्वर के पहलुओं पर भी जोर दिया, जिसमें उन्होंने समझाया कि पर्यावरण को नष्ट करके मानव खुद को नष्ट कर रहा है। इस दौरान गवर्निंग बॉडी के सदस्य वीके सिब्बल, प्रोफेसर सुच्चा सिंह गिल ने भी विचार रखे। संचालन क्रिड डायरेक्टर सुनील बंसल ने किया।