बीते कई दिनों से जरूरतमंदों का पेट भर रहीं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को अब प्रशासन की तरफ से अब राशन मुहैया कराया जाएगा। अमर उजाला की खबर पर संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने यह फैसला किया है।
बता दें कि गरीब लोगों को भोजन करा रहीं कई सामाजिक संस्थाओं की ओर प्रशासन की ओर से मदद न मिलने पर हाथ खड़ा करने संबंधी खबर को अमर उजाला ने अपने 16 अप्रैल के अंक में ‘कई संस्थाओं ने खड़े किए हाथ.. दिहाड़ीदार और गरीबों के सामने खाने का संकट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद प्रशासन ने सामाजिक संस्थाओं को अब राशन मुहैया कराने का फैसला किया है।
एडवाइजर मनोज परिदा ने शुक्रवार को अमर उजाला को एक खास बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ संस्थाओं ने पैक खाना तैयार करने का काम रोक दिया है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के सामाजिक संस्थाओं ने काफी मदद की है। प्रशासन व संस्थाओं को उम्मीद थी कि लॉकडाउन 14 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा लेकिन जब यह आगे बढ़ गया, और भी आगे बढ़ने की आशंका है।
ऐसे में संस्थाओं के सामने खाना खिलाना जारी रखना एक चुनौती बन गई और वह चिंता में पड़ गए कि इसे आगे कैसे जारी रखा जाए। इस मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है और संस्थाओं की मदद करने का फैसला लिया है। डीसी मनदीप सिंह बराड़ विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों आदि के साथ बैठ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के पास फंड की कमी नहीं है। कोविड फंड में प्रशासन के पास 1 करोड़ 90 लाख रुपये हैं। प्रशासन इन पैसों का इस्तेमाल संस्थाओं को राशन देने के लिए भी करेगा।
50 प्रतिशत राशन मुहैया करा सकता है प्रशासन
संस्थाएं आने वाले दिनों में पैक खाना देने का काम जारी रख सकें, इसलिए लिए क्या पैटर्न अपनाया जाए इसके लिए मंथन जारी है। हालांकि जानकारी के अनुसार प्रशासन 50 प्रतिशत राशन मुहैया कराने के प्लान पर काम कर रहा है। इसके तहत रोजाना बनने वाले खाने के लिए आधा राशन प्रशासन मुहैया करा सकता है जबकि आधे की जिम्मेदारी संस्था की होगी। ऐसा इसलिए ताकि ज्यादा दिनों तक जरूरतमंदों को खाना दिया जा सके।
बिना कार्ड धारकों को राशन की जगह दिया जा रहा पैक खाना
एडवाइजर ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत करीब 8 हजार परिवारों को राशन दिया जा चुका है और ऐसे 64 हजार परिवारों को गेहूं और दाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर चंडीगढ़ की जनसंख्या करीब 12 लाख है। इसमें करीब ढाई से तीन लाख परिवार होंगे। इनमें से 64 हजार परिवारों को राशन दिया जा रहा है। ऐसे में ज्यादातर जरूरतमंद परिवार कवर हो जाएंगे।
प्रशासन कानून के दायरे से बाहर जा कर काम नहीं कर सकता है। शहर में कई लोग ऐसे हैं, जो चंडीगढ़ के रहने वाले नहीं हैं। बाहर से आकर यहां पर रह रहे हैं। हालांकि वह जरूरतमंद हो सकते हैं, ऐसे लोगों के लिए प्रशासन की तरफ से पैक्ड फूड व जगह-जगह खाना मुहैया कराया जा रहा हैं, लेकिन ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में शामिल कर राशन देना मुश्किल है।