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डांसर गोलीकांड: हथियारों की खौफनाक हकीकत देखिए, क्यों न बहे खून

Wed, 07 Dec 2016 04:12 PM IST
हर्ष सलारिया/सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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शादी में फायरिंग
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शादी में डांसर की हत्या पहली बार नहीं, ऐसा पहले भी होता रहा हैं। पीछे की वजह कुछ और है, जिसे न रोका गया तो शदियों में खून बहता रहेगा।
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पंजाब में आतंकवाद को खत्म हुए 21 साल का वक्त बीत चुका है पर अब भी हथियारों को रेवड़ियों की तरह बांटा जा रहा है और पंजाब के लोग सिर्फ स्टेट्स सिंबल के लिए हथियारों को लेकर अपनी टौर बनाते हैं।

हादसा चाहे सेल्फी लेने वाले रमनदीप सिंह का हो या बठिंडा में डांसर को स्टेज पर गोली लगने का, पंजाब में स्टेट्स सिंबल के लिए मिले हथियार जानलेवा साबित हो रहे हैं। हकीकत यह है कि पंजाब में आर्म्ड लाइसेंस का आंकड़ा तीन लाख तक पहुंच चुका है।
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इसमें गुरदासपुर में अकेले 36 हजार से अधिक लोगों के पास लाइसेंसी हथियार हैं। बठिंडा दूसरे नंबर पर है, जिसका आंकड़ा 36 हजार को क्रास कर चुका है। लुधियाना तीसरे, मोगा चौथे स्थान पर है, जहां सूबे में सबसे अधिक हथियारों के लाइसेंस हैं।

आसानी से बन जाता है लाइसेंस

बठिंडा में शादी में फायरिंग में मारी गई लड़की
पंजाब में आर्म्ड लाइसेंस के लिए लंबा चौड़ा होमवर्क नहीं है और न सख्त कायदे कानून हैं, जिस कारण आर्म्ड लाइसेंस आसानी से बन जाता है। आवेदनकर्ता को सिर्फ दो हजार रुपये की जेब ढीली कर हथियार का लाइसेंस आसानी से मिल जाता है।

नियम है कि आवेदनकर्ता को क्या जान का खतरा है ? अगर पुलिस मुलाजिम यह रिपोर्ट बनाकर अधिकारियों को भेज देता है कि आवेदनकर्ता खुद पर खतरा महसूस करता है तो आसानी से लाइसेंस जारी कर दिया जाता है।

पंजाब में अमृतसर, जालंधर, लुधियाना ऐसे तीन कमिश्नरेट एरिया हैं, जहां हथियारों का लाइसेंस देने का काम पुलिस कमिश्नर के कंधों पर है जबकि बाकी तमाम जिलों में यह काम एडीसी स्तर के अधिकारियों के पास है।

तीन लाख से ज्यादा हैं आर्म्स लाइसेंस

Firing
पंजाब में वर्तमान में तीन लाख से भी अधिक लोगों के पास आर्म्स लाइसेंस है। प्रदेश में यह लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया काफी आसान है और डीएसपी स्तर के अधिकारी के अनुमोदन पर प्रार्थी को हथियार रखने का लाइसेंस मिल जाता है।

दरअसल, पंजाब में आतंकवाद के दौर में पहले-पहले तो शांति कायम करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक आदेश पारित कर आम लोगों से लाइसेंसी हथियार जमा करा लिए थे। लेकिन इसके बाद ऐसा समय भी आया जब सरकार ने माना कि आम लोगों के पास अगर लाइसेंसशुदा हथियार रहें तो दूर-दराज गांवों में आतंकियों के हमलों से खुद निपटने में सक्षम हो जाएंगे।

सरकार ने लाइसेंस प्रक्रिया आसान की और लोगों द्वारा खुद आतंकियों से निपटने के कई मामले सामने आने पर सरकार ने इस फैसले को सकारात्मक मान लिया, लेकिन आतंकवाद के लगभग ढाई दशक बीत जाने के बाद भी पंजाब में हथियार के लाइसेंस की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया और धीरे-धीरे लोगों ने हथियारों को अपने रुतबे का सिंबल बना लिया है।
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लेट नाइट डीजे पर रोक लगानी जरूरी

firing
आतंकवाद के समय में लोगों को जान बचाने के लिए सरल की गई लाइसेंस प्रक्रिया का लोग फायदा उठा रहे हैं। पंजाब में लाइसेंस प्रणाली पर शिकंजा कसने के साथ ही सार्वजनिक समारोह में हथियारों का प्रदर्शन रोकना पुलिस के लिए मुश्किल हो गया है।

पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक विवाह समारोह में सबसे पहले लेट नाइट डीजे पर रोक लगानी जरूरी है। रात दस बजे के बाद चंडीगढ़ की तर्ज पर डीजे पर रोक लगनी चाहिए।

नियम कायदे सभी जगह के लिए एक हैं, लेकिन पंजाब में पुलिस को इसकी अनुपालना के लिए आगे आना होगा। उनका कहना है कि प्रदेश में मैरिज पैलेसों केलिए कड़े कानून तो हैं, लेकिन इन पर अमल किए जाने में बरती जा रही ढिलाई साफ दिखाई दे रही है।
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