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कांटों में खिलते फूल देखने हैं तो आएं पंचकूला

Wed, 23 Jul 2014 03:16 PM IST
सर्वेश कुमार/अमर उजाला, पंचकूला
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कैक्टस में सिर्फ कांटे ही होते हैं यह भ्रम सेक्टर-5 के कैक्टस गार्डन में पहुंचते ही दूर हो जाएगा। जी हां, गार्डन में कैक्टस और सक्यूलेंट की सैकड़ों प्रजातियां हैं। इन पर बारिश की बूंदे पड़ते ही कांटेदार कैक्टस के बीच फूलों की खूबसूरती देखती ही बनती है। भले ही इनमें खुशबू न हो, लेकिन अपनी सुंदरता से लोगों को बरबस ही खींच लेते हैं।
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गार्डन में अलग-अलग देशों से मंगाई गई कैक्टस की प्रजातियां हैं। खास बात है यह कि इनको बनाए रखने के लिए उनके जरूरत के मुताबिक वातावरण भी तैयार किया है। ताकि, उनकी ग्रोथ में रुकावट न आए। मैनेजर निधि भारद्वाज ने बताया बारिश की शुरुआत होते ही कैक्टस में फूल खिलने शुरू हो जाते हैं।

इन फूलों को बड़ी संख्या में शहरवासी देखने आते हैं। यहीं नहीं यह मन लुभावन फूल चर्चा का विषय बने हुए हैं। उनका कहना है लोगों में आम भ्रम है कि कैक्टस में सिर्फ कांटे ही होते हैं, लेकिन यहां आकर उनकी खूबसूरती को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
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फेयरो कैक्टस (ग्राफ्टिंग), जाइमोकैलेशियम, क्लैस्टो कैक्टस, मैमलेरिया गुल्जिमाना, आपेन्शिया, युका (सक्यूलेंट) के साथ कुछ और प्रजातियां हैं, जो गार्डन के सौंदर्य को बढ़ा रहीं हैं। मैनेजर के मुताबिक, कैक्टस और हरियाली के कारण यहां अक्सर अलग-अलग प्रजाति के पक्षी भी पहुंचते हैं।

फलों से तैयार होते हैं जैम और वोदका भी
यूका में लदे फल के उपरी हिस्से को छीलकर इससे जैम और वोदका भी तैयार की जाती है। मूल रूप से अमेरिकी प्रजाति के इस सक्यूलेंट के फलों की खूबसूरती के साथ-साथ फलों के स्वाद को भले ही यहां लोग नहीं जानते हों, लेकिन विदेश में इसका कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा है। एक साथ काफी संख्या में फलों के होने के बावजूद ये पेड़ दूर से ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
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