भाखड़ा बांध से पानी छोड़े जाने से ब्यास व सतलुज उफान पर हैं। बाढ़ का पानी भुलत्थ के करीब 15 गांवों में घुस गया हैं। जहां पर करीब 450 लोग फंसे हैं। हालांकि जिला प्रशासन की सिविल व सेना की दो टीमों ने 250 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। डीसी कैप्टन करनैल सिंह ने अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
सब-डिवीजन भुलत्थ के ढिलवां एरिया के धुस्सी बांध के साथ लगते मंड कूकां, मंड इब्राहीमवाल, रायपुर अराईयां, चक्कोकी, बुताला, ढिलवां, मिर्जापुर, दाऊदपुर, मंड हबीबवाल, घग्ग दौलतपुर, मंड सरदार सिंह वाला, नंगल लुबाना समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोग अपने पशुओं को पानी के बीच से सुरक्षित स्थानों पर लेकर जा रहे हैं।
गांव तलवंडी कूका के मंड क्षेत्र से पुलिस और भारतीय सेना की टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। मंड क्षेत्र में 450 से अधिक लोग फंस गए हैं। इनमें से 250 से अधिक लोगों को जिला प्रशासन की टीमों ने भारतीय सेना की 88 आर्म्ड रेजिमेंट, पंजाब पुलिस की टीमों के सहयोग से सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है। तलवंडी कूका में भारतीय सेना और पंजाब पुलिस लोगों को छह नावों से बाहर निकाले में जुटी हैं।
मोगा के तीन गांवों में बाढ़ का खतरा
भाखड़ा बांध से पानी छोड़ने के बाद मोगा में सतलुज नदी उफान पर है। जलस्तर बढ़ने पर सतलुज नदी के किनारे बसे तीन गांव हमेशा पानी की चपेट में आ जाते हैं। अब ग्रामीणों को एक बार फिर चिंता सताने लगी है। गांव संघेड़ा, कंबू खुर्द और मेहरू वाला में 300 से अधिक परिवार रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 20 दिन पहले सतलुज का जलस्तर बढ़ने से गांव में काफी नुकसान हुआ था। कई कच्चे मकान ढह गए थे और पक्के मकानों को भी नुकसान पहुंचा था। अब एक बार फिर सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। लोग अपने-अपने सामान को बचाने की कोशिश में जुटे हैं। लोगों का कहना है कि पीने के पानी की समस्या है। चारा भी नहीं है। ग्रामीणों ने सरकार से पुख्ता इंतजाम करने की मांग की।