जैसे ही पानी का बहाव तेज हुआ मुस्तकिन की मुश्किलें बढ़ती गईं। उसने रात नौ बजे यमुना के दूसरे तरफ अपने गांव में फोन से अपने फंसे होने की सूचना दी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी। इस बीच रात काफी गहरी हो गई थी, एक तरफ पानी का तेज बहाव था तो दूसरी तरफ घना अंधेरा। रेस्क्यू मुश्किल भरा था।
पहले आईआरबी की टीम द्वारा इनको बाहर निकालने की कोशिश की गई लेकिन असफल रहे। देर रात डीसी विनय प्रताप सिंह और एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने प्रदेश की मुख्य सचिव से बात की और सरसावा से मदद मांगी।
मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने तुरंत भारत सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त सचिव संजीव जिंदल के सहयोग से उत्तर प्रदेश के सरसावा स्थित एयरबेस से वायुसेना का हेलीकॉप्टर मंगवाया। इस पूरे ऑपरेशन में जिले के डीसी विनय प्रताप सिंह और एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने अहम रोल अदा किया और अच्छे तालमेल के कारण नौ लोगों की जान बच गई।
मोबाइल की लोकेशन पर पहुंचा हेलीकाप्टर
उस समय रात के 2.30 बज चुके थे। पानी कई फुट तक चढ़ चुका था और लगातार बढ़ता जा रहा था। अंधेरी रात में मुस्तकिन के परिवार की लोकेशन स्पष्ट नहीं हो रही थी। मुस्तकिन के परिवार के एक सदस्य के पास मोबाइल था, उसी से लोकेशन ढूंढने में मदद मिल गई और रेस्क्यू ऑपरेशन करना आसान हो गया।
पुलिस के साइबर सेल ने भी इसमें काफी मदद की और मोबाइल के टावर की लोकेशन लेकर दी गई। वायुसेना के पायलट ने मुस्तकिन के परिवार को एयर लिफ्ट कर हेलीकॉप्टर में बैठाया और उसे यूपी के सरसावा एयरबेस के अस्पताल में सकुशल उतारा। सोमवार को इंद्री थाना प्रभारी अपनी गाड़ी से परिवार को इंद्री लेकर आए। इससे पहले सरसावा में सभी का चेकअप कराया गया।