चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के कई अलॉटी मकानों का ट्रांसफर कर सकेंगे। इन मकानों के ट्रांसफर पर चार साल से लगी रोक सीएचबी ने हटा ली है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने यह फैसला हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया है।
इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। सीएचबी के फैसले के मुताबिक 11 अक्तूबर 2011 तक के जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए), स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी और एग्रीमेंट टू सेल/विल के मकानों के ट्रांसफर की परमिशन दी है। यह फैसला जनरल हाउसिंग स्कीम के फ्लैट्स पर लागू होगा, जो ड्रॉ के जरिये अलॉट हुए हैं।
जैसे पहले बिना इंस्पेक्शन के मकान ट्रांसफर होते थे वैसे ही होने चाहिए। लोगों को वॉयलेशन के नोटिस मिले हैं तो उनसे एफिडेविट लेकर नोटिस को मकान मालिक के नाम पर ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
रजत मल्होत्रा, सेकेट्री, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड रेजिडेंट वेलफेयर फेडरेशन
लॉक इन पीरियड के मकान हो सकेंगे ट्रांसफर
इस निर्णय से लॉक इन पीरियड (पांच साल) में बिके मकान भी ट्रांसफर हो सकेंगे। नियम है कि अलॉटमेंट के 5 साल तक मकान बेचे नहीं जा सकते। जो बेचते थे, सीएचबी उन्हें खरीदार के नाम ट्रांसफर नहीं करता था। हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद यह अड़चन दूर हो गई है।
यह है मामला
कुलदीप चंद पठानिया बनाम चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और अन्य के खिलाफ केस में 13 जनवरी 2015 को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि अगर अलॉटी या खरीदार ने मकान की पूरी कीमत सीएचबी को अदा कर दी है तो सीएचबी मकान ट्रांसफर करने से रोक नहीं सकता।