चंडीगढ़। पांच साल पहले शुरू की एक पहल के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चे अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी कर पा रहे हैं। पहले सेक्टर-36सी स्थित सोरेम स्कूल में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को व्यावसायिक कौशल सिखाए जाते थे। स्कूल में केवल कौशल संबंधी पढ़ाई करवाई जाती थी। लेकिन पांच वर्ष पूर्व स्कूल प्राचार्य और अर्चना चौधरी के योगदान से विशेष बच्चों के लिए 10वीं और 12वीं का पहला बैच शुरू किया गया। इसके तहत पहली बार पांच बच्चों ने वर्ष 2021 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल से बारहवीं कक्षा की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की। इसके बाद स्कूल में वर्तमान में 14 बच्चों के बैच को दसवीं और बारहवीं की परीक्षा के लिए तैयार करवाया जा रहा है। बच्चों की स्पेशल जरूरतों को समझते हुए उनके आईक्यू लेवल के अनुसार प्रेक्टिकल और रिपिटेटिव पढ़ाई का तरीका अपनाया जाता है। बच्चों पर अधिक दबाव नहीं पड़े इसलिए एक साल में उन्हें दो पेपरों के लिए ही तैयार किया जाता है।
पहले बैच से पास हुए बच्चे जीवन के अगले पड़ाव में सीख रहे नए कौशल
पिता संग दुकान संभालते हैं प्रतीक
स्कूली शिक्षा पूरी कर प्रतीक अब पिता के साथ दुकान संभालते हैं। शारीरिक और मानसिक कमियां होने के बावजूद प्रतीक अपने कौशल को निखारने में लगे हैं। उनके पिता ने बताया कि हिसाब करने में प्रतीक को थोड़ी परेशानी रहती है, लेकिन इसके अलावा वे सभी काम सक्षमता से कर लेते हैं।
पंजाब यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री कर रही हैं शगुन
शगुन पंजाब यूनिवर्सिटी से बीए कर रही हैं। शगुन ने बताया कि वह लाइब्रेरी का कोर्स करना चाहती हैं। वह सफलतापूर्वक अपना पहला सेमेस्टर पूरा कर चुकी हैं। उनकी मां ने बताया शगुन को बचपन से पढ़ाई का शौक रहा है। पढ़ाई के प्रति ललक होने का परिणाम है कि वह अब स्नातक की डिग्री कर रही हैं। शगुन 2022 के नेशनल एथलेटिक्स मीट में हिस्सा ले चुकी हैं।
होटल मैनेजमेंट में हाउस कीपिंग में सफलतापूर्वक ट्रेनिंग कर चुके हैं हरसिमरन
डाउन सिंड्रोम से प्रभावित हरसिमरन ने 12वीं की परीक्षा के बाद एक विशिष्ट होटल में छह महीने की हाउसकीपिंग की ट्रेनिंग की। उन्हें एक दो जगह से काम के प्रस्ताव भी आए हैं, लेकिन होटल दूर होने की वजह से उन्होंने वहां नौकरी नहीं की। हरसिमरन की मां ने बताया कि हरसिमरन आजकल पंजाबी सीख रहे हैं। हरसिमरन 2012 में स्पेशल ओलंपिक्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेबल टेनिस खेल चुके हैं।
कोट्स
बच्चों को 12वीं करवाने का उद्देश्य उन्हें सरकारी नौकरियों और अन्य मौकों को उपलब्ध करवाना है। हम नहीं चाहते कि स्कूल शिक्षा अधूरी रहने के कारण बच्चा किसी भी मौके को गवाएं। 12वीं पूरी करने के बाद बच्चों के सामने और अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। -अर्चना चौधरी, स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर