बैठक में पंजाब के पानी के संकट, पर्यावरण प्रदूषण और प्रदेश के संघीय ढांचे पर मंडराते खतरे के मुद्दों के अलावा 18 जनवरी को चंडीगढ़ में लगाए जाने वाले मोर्चे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मोर्चे के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने घोषणा की कि चंडीगढ़ में लगाया जाने वाला यह मोर्चा दिल्ली मोर्चे की तर्ज पर होगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब में पानी इतना गहरा हो गया है कि वह न तो फसलों के लिए फायदेमंद है और न ही पीने लायक। राजेवाल ने कहा कि सतलुज, ब्यास, रावी के पानी का मालिक पंजाब है, जिसकी गवाही संविधान भी देता है क्योंकि पानी का मुद्दा राज्य का विषय है।
उन्होंने कहा कि जब पानी नहीं होगा तो लोग वीरान जगहों पर चले जायेंगे, न तो पंजाबी संस्कृति रहेगी और न ही पंजाबियत रहेगी। उन्होंने बताया कि सभी जिलों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, मोर्चे की तैयारियां मुकम्मल होने के करीब हैं। मोर्चा को लेकर लोगों में भारी उत्साह है। पूरे प्रदेश में इस मोर्चे को लेकर बैठकें, रैलियां, फ्लैग मार्च और पंफलेट बांटने का काम जारी है। किसान अपने ट्रैक्टर ट्रालियां तैयार कर रहे हैं। दिल्ली मोर्चे की तर्ज पर राशन जमा किया जा रहा है क्योंकि किसान लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार हैं।
किसान नेता राजेवाल के अलावा कंवलजीत सिंह पन्नु, प्रेम सिंह भंगु, दलबीर सिंह बेदादपुर और बेअंत सिंह ने कहा कि हजारों की संख्या में किसान 18 जनवरी को ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर पहुंचेंगे और चंडीगढ़ के लिए कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि मोर्चा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा।